Saturday, 16 November 2019

मेरी पड़ोसन चालू लड़की की चुदाई (Chalu Ladki)

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नमस्कार मेरे पाठक दोस्तो,

मैं पंजाब से आयुष हूँ। मैंने यह कहानी लिखी है क्योंकि मैं आप सभी को अपनी एक सत्य घटना बताना चाहता हूँ।

मैं अपनी थ्री ईयर आर्ट्स की पढ़ाई पूरी कर चुका हूँ और मै अभी आगे भी पढने की सोच रहा हूँ। लेकिन हमारा कॉलेज घर से बहुत दूर था। तो मैं अपने चाचा के घर रहने लगा था। उनका घर कॉलेज के नजदीक था। मेरे अंकल का लड़का विदेश गया हुआ था। मैं तो प्रातः कॉलेज जाता और संध्या को पांच बजे तक कॉलेज से वापस आ जाता था।

मेरे अंकल के पड़ोस में एक परिवार किराये पर रहता था। उनकी तीन लड़कियाँ थी मीना, अकांक्षा और पूजा। सबसे बड़ी लड़की मीना को देख कर मेरा मन उस पर लट्टू होने लगा था। वो थी ही इतनी सुन्दर।

उसकी छोटी बहन पूजा कभी कभी अंकल के घर आया करती थी। मैंने उसके जरिये मीना से बात करने का इरादा बनाया। लेकिन डर रहता था कि वो मेरी मदद नहीं करे या किसी को बता दिया तो क्या होगा। मैंने हिम्मत करके एक पत्र लिख कर उसकी बहन को दे दिया कि वो पत्र मीना को दे देना।

मैं उसे जितना बच्चा या नासमझ सोचता था वो उतनी नहीं थी। वो समझ गई और बोली- आप खुद ही क्यों नहीं दे देते?

पर मैंने जैसे तैसे उसे मना लिया। अगले दिन मैं उसके जवाब का इन्तज़ार करने लगा। वो सात बजे हमारे घर आई और आंटी से बात करने लगी। मैं छत पर चला गया तो वो भी बहाना बना कर छत पर चली आई। मैंने उससे धीरे से पत्र के बारे में पूछा तो उसने पत्र का जवाब दिखा कर अपनी ब्रा में रख लिया और बोली खुद ही ले लो।

मैं उसकी बात सुन कर हैरान रह गया। अरे यह तो बहुत ही चालू लड़की है। मैंने उसकी कमीज में हाथ डाल दिया और पत्र निकालने के बहाने उसकी चूचियाँ दबाने लगा। तो वह बोली- क्या बात है रात रंगीन करने का इरादा है?

मैं उसकी बात सुन कर फिर से सुन्न सा रह गया कि अभी इसकी उम्र तो छोटी सी है और यह तो चुदने को भी राजी है।

मैंने हाँ कर दी तो बोली- चलते हैं किसी होटल में। मैंने अपनी बाईक ले ली और होटल की तरफ़ चल दिया।

वहाँ हम सारी रात एक दूसरे के साथ सेक्स करते रहे। उसने बताया कि उसने मेरे साथ पहली बार ही सेक्स किया है।

वो बहुत खुश थी, कहती थी कि बहुत मजा आया।

बाद में जब मैंने पत्र मांगा तो उसने मुझे दे दिया, लेकिन एक शर्त थी कि मैं उसे ऐसा मजा फिर से दूँ। मैंने उसे वहीं लिटा लिया।

उसने अभी अन्डरवियर नहीं पहना था। मैंने अपना लण्ड उसकी चूत में गाड़ दिया और बहुत अन्दर गहराई तक पेल दिया। वो सिसक रही थी ऊऊओह्हह् हह्हह हीईईईई और अंदर ह्हह हह्हह्ह ह्हह फ़ाड़ डालो। अहहह हह्हह।

लगभग आधे घण्टे बाद हम एक दूसरे से अलग हुए। उसने अपने कपड़े पहने और मैंने भी अपने कपड़े पहन लिये। उसके बाद मैंने वह पत्र पढ़ा तो मुझे हैरानी हुई कि उसकी बहन भी मुझ पर मरती है।

फिर उसने मुझे रात को अपने घर पर बुलाया।

पूजा ने बताया कि आज रात को उसके घर में कोई नहीं होगा, तुम रात को आ जाओ। मैं उस दिन कॉलेज नहीं गया। रात को मैं उसके घर गया और कॉल बेल बजाई। पूजा ने मुस्करा कर दरवाजा खोला।

फिर हम उसकी बहन के कमरे में चले आये और कहा कि मेरा इन्तज़ार करो। उसकी बहन पूजा ने हम सभी के लिये खाना बनाया। भोजन के उपरान्त हम सभी ने ग्रुप सेक्स किया। मैं उस रात को बहुत खुश था फिर मैं वापस चला आया। अब तो जब भी हमें मौका मिलता है, हम सेक्स करते हैं।

मैं आगे की कहानी अगली बार लिखूंगा।

चचेरी बहन के साथ सेक्स

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मैं पहली बार अपना एक्सपेरियंस शेयर करने जा रहा हूँ। ये बिल्कुल ही सच्ची कहानी है मेरी चचेरी बहन गांव से अपनी पढ़ाई के लिए हम लोगो के पास शहर मे आई थी। उस समय वो

इंटर मे दाख़िले के लिये आई थी और मैं ग्रेजुएशन मे था। हम लोग शुरू से शहर में रहते थे। मेरे पिताजी सरकारी नौकरी मे थे। मैं घर मे सबसे छोटा हूँ। मेरी बहन मुझसे छोटी थी क़रीब 5 साल की

थी। शुरू मे तो ऐसा कोई ख़्याल नही आया, मगर धीरे धीरे मन सेक्स की तरफ़ होने लगा। हम लोगो का कमरा छोटा था और हमलोग सब एक ही बेड पर सोते थे। मैं अक्सर अपनी बहन के बगल मे

सोया करता था। रात मे सोते समय मेरे हाथ उसके पेट को छूते थे। मुझे तो आकर्षण महसूस होता था मगर उसके बारे मे मुझे कुछ पता नही चल पाता था।

एक दिन मैंने उसके स्तन को छुआ तो उसने थोड़ा विरोध किया मैंने तुरत अपना हाथ हटा लिया। फिर मैंने एक बार कोशिश की लेकिन फिर से हटा दिया मगर कुछ बोला नही मुझे भी डर

लग रहा था क्योंकि मेरी मा और मेरी अपनी दोनो बहन भी बगल मे सोई हुई थी।

दूसरे दिन मैंने फिर से कोशिश की इस बार मैंने उसके स्तन को तोड़ा ज़ोर से प्रेस किया इस बार उसकी थोड़ी सहमति थी मैंने धीरे धीरे काफ़ी देर तक प्रेस किया शायद उसे भी आनंद आ रहा था।

ये कार्यक्रम काफ़ी दिनो तक चला। एक दिन उसने मुझसे पूछा की आप ऐसा क्यों करते है तो मैंने बोला की क्यों तुम्हे पसंद नही है तो उसने कहा नही ऐसी कोई बात नही मगर किसी को पता चलेगा तो क्या होगा।

तब मैंने कहा किसी को पता नही चलेगा। तुम साथ दो तो कुछ नही होगा। फिर उसने हामी भरी। अब हम लोग घर मे किसी के नही रहने का इंतज़ार करने लगे और ये मौक़ा भी

हमे जल्द ही मिल गया और मैंने कहा की अब मैं कुछ और टेस्ट करना चाहता हूँ।

तो उसने पूछा क्या तो मैंने कहा, मैं तुम्हरा स्तन देखना चाहता हूँ उसने पहले तो मना किया फिर थोड़ी देर मे हामी भर दी तो मुझे ग्रीन सिग्नल मिल गया और फिर मैंने धीरे से से उसके सलवार को उपर किया और उसके ब्रा को उपर किया तो देखा की दो गोल गोल स्तन मेरे सामने थे जो की मैंने पहले कभी नही देखा था और फिर मैंने अपने दोनो हाथों से उसको दबाना शुरू कर दिया

शायद उसे भी अच्छा लग रहा था और वो ज़्यादा ही उत्तेजित हो रही थी। फिर काफ़ी दिनों तक चलता रहा मगर असली प्यास अभी नही बुझी थी और मेरा मन उसको चोदने को करने लगा।

एक दिन मैंने कहा की ये सब काफ़ी हो गया क्यों ना ज़िंदगी की असली मज़ा लिया जाए तो उसने कहा – क्या ? तो मैंने कहा ज़िंदगी की सुख तो चुदाई मे ही हैं जो कि हर आदमी और औरत की ज़रूरत है।

तब उसने कहा इसमे कोई रिस्क तो नही है ?

मैंने कहा- नहीं, सावधानी के साथ करेंगे। मगर पता नही उसे काफ़ी डर लग रहा था और हिम्मत नही जुटा पा रही थी। काफ़ी समझाने के बाद उसे विश्वास हो गया और उसने हामी भर दी

और हमलोग एकांत का इंतेज़ार करने लगे और एक दिन हमे मौक़ा मिल गया जब मेरी मां और बहन बाज़ार गये और हम दोनो घर मे अकेले थे तब मैंने कहा क्यों ना अपनी ज़िंदगी की प्यास भुझा ले।

उसने दबी ज़ुबान मे हां कही और फिर मैंने धीरे धीरे उसके सलवार और पायजामा को खोला अब वो ब्रा और पेण्टी मे मेरे सामने थी उसका बदन तो मानो अप्सरा का बदन लग रहा था और शर्मा रही थी और अपने चेहरे को अपनी हाथों से ढके हुई थी

फिर मैंने धीरे से अपने कपड़े को उतारा और उसके स्तन को धीरे धीरे दबाना शुरू किया शायद उसे अच्छा लग रहा था अब मैंने उसके ब्रा को खोल दिया और मेरे सामने उसके संतरे जैसे दो चीज़ आ गई और मैंने अपने मुह से उसके स्तन को चूसना शुरू किया ये अहसास उसे अच्छा लग रहा था और वो ज़यादा उत्तेजित हो रही थी और मैं भी अब काफ़ी उत्तेजित होने लगा था।

फिर मैंने उसके पेण्टी को उतार दिया अब मेरे सामने मानो जैसे दुनिया की सबसी बड़ी चीज़ नज़र आ रही थी क्योंकि अभी तक मैंने किसी भी लड़की को ऐसे नही देखा था। अब मैंने अपने लंड को उसके मुंह मे दे दिया।

पहले तो उसने मना किया काफ़ी मनाने के बाद वो मान गई और मेरे लंड को चूसना शुरू कर दिया मैं तो मानो की सातवे आसमान मे सफ़र कर रहा था उस अहसास

का बयान मैं नही कर सकता की मैं कैसा महसूस कर रहा था। उसके चूसने से मेरा लंड काफ़ी टाईट हो गया और मैंने इसे उसके बुर मे धीरे धीरे डालना शुरू किया उसे काफ़ी तकलीफ़ महसूस हो रही

थी।

पहली बार किसी मर्द के लंड उसके बुर मे जो जा रहा था। मैंने उसकी तकलीफ़ को समझते हुए धीरे धीरे लंड को अंदर डाला अब तो उसे भी मज़ा आने लगा और थोड़ा ऊऊऊ आआआ ईईई

के आवाज़ के साथ वो पूरा मज़ा लेना चाहती थी और मैं भी इस मौक़े को छोड़ना नही चाहता था और हमलोगो ने क़रीब 1 घंटे तक अपनी जवानी का मज़ा लिया लेकिन इसके बाद हम दोनों की चाहत

बढ़ती गई और हम लोग रात मे भी ये काम सबसे बचते हुए करने लगे और घर मे कोई ना हो तो फिर क्या कहना। इस तरह से हमलोगो ने क़रीब 7 साल तक अपनी जवानी का मज़ा लेते रहे। अब

उसकी शादी हो चुकी है मगर मैं अभी भी कुंवारा हूँ और उन दिनों के बारे मे सोचकर आज भी दिल रोमांचित हो जाता है।

Thursday, 14 November 2019

गाँव की गोरी और डॉक्टर की चुदाई -2 (Gaon Ki Gori Aur Doctor ki chudai- part 2)

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“डॉक्टर साहब मुझे बहुत डर लग रहा है, मेरी इज़्ज़त से मत खेलिए ना! जाने दीजिए, मेरा बदन उईइ माँ!”
“मुझ पर यक़ीन करो गोरी … यह एक मर्द का वादा है तुझसे! मैं सब देख लूंगा। तेरा बदन तड़प रहा है गोरी एक मर्द के लिए, तेरी चूत का बहता पानी, तेरे कसते हुए बूब्स साफ़ कह रहे हैं कि अब तुझे संभोग चाहिए।”
“साहब।”
“हाँ गोरी मेरी रानी, बोल?”
“मैं माँ बनूँगी ना?”
“हाँ!”
“मेरा मर्द मुझे अपने साथ रख लेगा ना। मुझे मारेगा तो नहीं ना!”
“हाँ गोरी, तू बिल्कुल चिंता ना कर।”

“तो साहब फिर अपनी फ़ीस ले लो आज रात, मेरी जवानी आपकी है।”
“ओह! मेरी गोरी आ जा!”

और हम दोनों फिर लिपट गए मेरा लण्ड विशाल हो उठा।

“डॉक्टर साहब बहुत प्यासी हूँ। आज तक किसी मर्द ने नहीं सींचा मुझे! मेरे तन बदन की आग बुझा दो साहब!”
“तो फिर आ मेरी जाँघों पर रख दे अपने चूतड़ और लिपट जा मेरे बदन से!”

थोड़ी देर बाद मेरे हाथ मेरी कमीज़ के बटनों से खेल रहे थे, कमीज़ उतरी, फिर मेरी पैंट। गोरी की नज़र मेरे बदन को घूर रही थी।
मेरा अंडरवियर इससे पहले फट जाता, मैंने उसे उतार डाला।

और फिर ज्यों ही मैं सीधा हुआ ….
मेरे लण्ड ने अपनी पूरी खूबसूरती से अपने शिकार को पूरा तनकर उठकर सलाम किया। अपने पूरी लंबाई और बड़े टमाटर जीतने लाल सुपारे के साथ!

गोरी बड़े ज़ोर से चीखी और बिस्तर से उठकर नंगी ही दरवाज़े की तरफ़ भागी।
“क्या हुआ गोरी?” मैं घबरा गया, मैं तना हुआ लण्ड लेकर उसकी तरफ़ दौड़ा।
“नहीं, मुझे कुछ भी नहीं करवाना। नहीईए मुझ … मुझे जाअ… जाने दो।” गोरी फिर चीखी।
“क्या हुआ गोरी?” लेकिन मैं उसकी तरफ़ बढ़ता ही रहा।

“साहब आपका ये ल ल लण्ड … ये लण्ड तो बहुत बड़ा और मोटा है ब बा बाप रे!! यह तो गधे के जैसा है … नहीं यह तो मुझे चीर देगा।”

“आओ गोरी, घबराओ मत! असली मोटे और मज़बूत लण्ड ही योनि को चीर पाते हैं! गौर से देखो इसे छूकर देखो। इसे प्यार करो और फिर देखो ये तुम्हें कितना पागल कर देगा।”
“डॉक्टर साहब, है तो बड़ा ही प्यारा और बेहद सुंदर मुस्टंडा सा! मेरा तो देखते ही इसे चूमने का मन कर रहा है उफ़्फ़्फ़्फ़! कितना बड़ा है पर साहब, ये मेरी चूत में कैसे घुस पाएगा इतना मोटा? मैं तो मर जाऊँगी। राजन का लण्ड तो इसके सामने बहुत छोटा है जब वो ही नहीं जाता तो ये कैसे?”

“यही तो मर्द की संभोग कला कौशल होता है मेरी रानी, चूत खोलना और उसे ढंग से चोदना हर मर्द के बस की बात नहीं! वो भी तेरी चूत जैसी कुँवारी, क़रारी! तू डर मत, शुरू में थोड़ा सह लेना बस फिर देखना तू चुदवाते चुदवाते थक जाएगी पर तेरा मन नहीं भरेगा।”

“चल अब आ जा मेरी जान! अब और सहा नहीं जा रहा। मेरे लण्ड से खेलो मेरी रानी।” कह कर मैंने उसे उठा लिया बांहों में और बिस्तर पर लिटा दिया।

उसकी चूत ही नहीं बल्कि घुटनों तक जांघें भी भीग चुकी थी, बूब्स एकदम सॉलिड और बड़े बड़े हो गये थे, साँस के साथ ऊपर नीचे हो रहे थे, साँस ज़ोर ज़ोर से चल रही थी।

मैं बिस्तर पर चढ़ा और उसके सीने पर बैठ गया, उन्नत उठे बूब्स के बीच में मैंने अपने लंबे खड़े लण्ड तो बिठा दिया और दोनों बूब्स हथेली से दबा दिए मेरा लण्ड बूब्स के बीच में फंस गया। उंगलियों से बूब्स के निप्पल रगड़ते हुए में बूब्स को मसलने लगा और लण्ड से उसके संकरे क्लीवेज को फक करने लगा।

ऊपरी भाग में लण्ड का लाल सुपारा नंगा होकर उसके होंठों से छुआ करता और निचली भाग में नाभि की छुवन। उत्तेजना में आकर गोरी ने ज्यों ही चिल्लाने के लिए लब खोले ही थे कि मेरे लण्ड का सुपारा उसमें जाकर अटक गया और वो गों … गो … गू … गूओ … की आवाज़ करने लगी।
मैंने और ज़ोर लगाया ऊपर को तो लगभग आगे से 2-3 इंच लण्ड उसके मुँह में घुस गया। थोड़ी देर की कशमकश के बाद मोशन में सेट हो गया और मैं स्वर्ग में था।

लण्ड ने स्पीड पकड़ ली थी, गोरी का मुँह भी मेरे सुपारे को मस्त चूस रहां था, सुपारा अंदर तक जाकर उसके गले तक हिट कर रहा था।

कामुकता से गोरी के स्तन और भी बड़े, विशाल हो गये थे। अब मैं हल्का सा उठ कर आगे को सरका और गोरी के बूब्स पर बैठ गया और मैंने जितना संभव था, लण्ड उसके मुँह में घुसा दिया।

मेरी जाँघों के बीच कसा उसका पूरा बदन मोशन में बिना पानी की मछली की तरह तड़प रहा था।

थोड़ी देर के बाद मैंने लण्ड को निकाला और अब गोरी ने मेरे दोनों टट्टों को चाटना शुरू किया। बीच में वो मेरे लंबे लण्ड पर अपनी जीभ फिराती तो कभी सुपारे को चाट लेती।

थोड़ी देर के बाद मैंने 69 की पोजीशन ले ली तो उसे मेरे काम अंगों और आस पास तक पूरी पहुँच मिल गयी, अब वो मेरे चूतड़ भी चाटने लगी मैंने भी गांड का छेद उसके मुँह पर रख दिया।

उसने बड़े प्यार से मेरे चूतड़ को हाथों में लिया और मेरी गांड के छेद पर जीभ से चाटा। इस बीच मैंने भी उसकी चूत को अपनी जीभ से चाटा और चोदा।

पर वाकयी उसकी चूत बड़ी कसी थी जीभ तक भी नहीं घुस पा रही थी उसमें … एक बार तो मुझे भी लगा कि कहीं वो मर ना जाए मेरा लण्ड घुसवाते समय!

फिर मैंने उसे पलट कर के उसके बड़े बड़े गोल गोल चूतड़ भी चूसे और चाटे।

अब गोरी बड़े ज़ोर ज़ोर से सिसकारी भर रही थी और बीच बीच में चिल्ला भी उठती थी। वो मेरे लण्ड को दोनों हाथों से पकड़े हुए थी और अब काफ़ी ज़ोर ज़ोर से चिल्लाने लगी थी- डॉक्टर साहब, चोद दो मुझे … चढ़ जाओ मेरे ऊपर … घुसा दो डॉक्टर साहब! दया करो मेरे ऊपर, नहीं तो मैं मर जाऊँगी।
“चाहे मैं मर ही जाऊं पर अपना ये मोटा सा लोहे का डंडा मेरे अंदर डाल दो।”
“देखो साहब मेरी कैसी लाल हो गई है गर्म होकर! इसकी आग ठंडी कर दो साहब अपने हथौड़े से।”
“वाह! क्या मर्दाना मस्त लण्ड है डॉक्टर साहब आपका … कोई भी लड़की देखते ही मतवाली हो जाए और अपने कपड़े खोलकर आपके बिस्तर पर लेट जाए. आओ साहब, आ जाओ घुसा दो उफ़्फ़!”

मेरा लण्ड भी अब कामुकता की सारी हदें पर कर चुका था, मैं उसकी टांगों के बीच में बैठा और उसकी टांगों को हवा में भी शेप की तरह पूरी खोल कर उठाया और फिर उसकी कमर पकड़ उसकी चूत पर अपने लौड़े को रखा और आहिस्ता से पर ज़रा कस कर दबाया।
गोरी की कुंवारी चूत इतनी चिकनी थी कि लण्ड का सुपारा तो घुस ही गया और साथ ही गोटी की चीख निकली- आह मर ररर… मर गई डॉक्टर साहब!

“घबराओ नहीं मेरी जान!” और मैंने लण्ड को हाथ से पकड़ थोड़ा और घुसाया।
वो मुझे धक्का देने लगी, वो चिल्ला भी रही थी दर्द के मारे। तब मैं उसे ज़बरदस्ती नीचे पटक कर उस पर लेट गया। अपनी छाती से उसके बूब्स को मसलते मसलते आधे घुसे लण्ड को एक ज़बरदस्त शॉट मारा।
वो इतनी ज़ोर से चीखी जैसे किसी ने मार ही डाला हो! उसका शरीर भी तड़प उठा और उसने मुझे कस कर जकड़ भी लिया था। मेरे लण्ड का क़रीब 6 इंच अंदर घुसा हुआ था। और शायद उसकी कौमार्य की झिल्ली जो तनी हुई थी और अभी फटनी बाक़ी थी।

थोड़ी देर बाद जब वो शांत सी हुई तो बोली- डॉक्टर साहब, मुझे छोड़ दो, मैं नहीं सह पाऊँगी आपका लण्ड।
मैंने उसके होंठों पर अपने होंठ रखे और एक ज़बरदस्त चुम्बन दिया जिसमें उसके कठोर बूब्स बुरी तरह कुचल गये थे।
उसकी लंबी बांहों ने एक बार फिर मुझे लपेट लिया और उसकी टांग भी मेरी टांगों से लिपट रही थी जैसे ठीक से चुदने के लिए पोजीशन ले रही हो।

थोड़ी देर में जब मुझे लगा कि वो दर्द भूल गई है तो अचानक मैंने लण्ड को थोड़ा सा बाहर निकालते हुए एक भरपूर शॉट मारा। लण्ड का यह प्रहार इतना शक्तिशाली था कि वो पस्त हो गई, एक और चीख के साथ एक हल्की सी आवाज़ के साथ उसका कौमार्य आज फट गया था, शादी के एक साल बाद वो भी एक दूसरे मर्द से और इस प्रहार से उसका ओर्गास्म भी हो गया।
उसकी चूत से रस धार बह निकली और बूरी तरह हाँफ़ रही थी।

अब गोरी की चूत पूरी लसीली थी और मैं अभी तक नहीं झड़ा था, मैंने ज़ोरदार धक्कों के साथ उसे चोदना शुरू किया, उसकी टाइट चूत की दीवारों से रगड़ ख़ा के मेरा लण्ड छिल जा रहा था।
लेकिन मैं रुका नहीं और उसे बूरी तरह चोदता रहा।

फिर मैंने लण्ड उसकी चूत से खींच लिया और लण्ड एक आवाज़ के साथ बाहर आ गया सोडा वाटर की बोतल खोली हो।
मैंने उसे डॉगी स्टाइल में कर दिया और पीछे से लण्ड उसकी चूत में डाल उसे चोदने लगा। अब गोरी भी मस्ती में आ गई और मुझे ज़ोर से चोदने के लिए उकसाने लगी- चोदो मुझे डॉक्टर साहब, फाड़ दो मेरी! डॉक्टर साहब, छोड़ना मत मुझे… बुरी तरह फाड़ दो मुझे! और ज़ोर से चोद दो मुझे … मैं दासी हूँ आपकी! आपकी सेवा करूँगी, रोज़ रात दिन आपके सामने बिल्कुल नंगी होकर रहूंगी, “आपके लिए हमेशा तैयार रहूंगी और जब जब आपका लण्ड चाहेगा तब तब चुदवाने के लिए आपके बिस्तर पर लेट जाऊँगी। पर मुझे ख़ूब चोदो साहब … और ज़ोर से … और तेज़ी से चोदो साहब।
उस रात मैंने गोरी को दो बार चोदा।

दूसरे दिन दोपहर में ठकुराईन क्लिनिक में आ गई, मैंने उसे बताया कि चेकअप हो गया है और शाम तक छोटा सा ऑपरेशन हो जाएगा और कल आपकी बहू आपके घर चली जाएगी।
ठकुराईन संतुष्ट होकर वापस हवेली चली गई.

आज रात गोरी ख़ुद उतावाली थी कि कब रात हो। उसे भी पता था कि कल उसे वापस हवेली चले जाना है और आज की रात ही बची है सच्चा मज़ा लूटने का। उसने आज कामवासना में मैंने जैसा चाहा वैसे करने दिया। एक दूसरे के अंगों को हम दोनों ख़ूब चूसा, प्यार किया, सहलाया और जी भर के देखा।

फिर मैंने गोरी को तरह तरह से कई पोज़ में चोदा। साथ में आने वाले दिनों में उसे अपने ससुराल में कैसे रहना है और क्या करना है सब समझा दिया।

दूसरे दिन राजन भी शहर से आ गया, मैंने उसे समझा दिया- गोरी का ऑपरेशन हो गया है!
“डॉक्टर साहब गोरी अब माँ बनेगी ना?”
“हाँ पर तुम जल्दबाज़ी मत करना … अभी एक महीने तो गोरी से दूर ही रहना! और हाँ इसे बीच बीच में यहाँ चेकअप के लिए भेजते रहना, यह बहुत सावधानी का काम है!”
राजन ने कुछ असमंजस से हाँ भरी। फिर वह गोरी को ले गया।

गोरी मेरे प्लान के अनुसार बीच बीच में क्लिनिक में आती रही। मैं उसे शाम के वक़्त बुलाता जब गाँव के मरीज़ नहीं होते। रात 8-9 बजे तक उसे रख उसकी ख़ूब चुदाई करता, गोरी भी ख़ूब मस्ती के साथ मुझ से चुदती।

दो महीने बाद गोरी के गर्भ ठहर गया। मैंने गोरी को समझा दिया कि वह राजन से अब चुदवाए। उसकी चूत को तो मेरे लण्ड ने पहले ही भोसड़ा बना दिया था जहाँ अब राजन का लण्ड आराम से चला जाता।

राजन भी बहुत ख़ुश था कि डॉक्टर साहब के कारण ही अब वह अपनी बीवी को चोद पा रहा है, गोरी पहले ही मेरी दीवानी बन चुकी थी।

ठकुराईन को जब पता चला कि गोरी के पाँव भारी हो गये हैं तो उसने क्लिनिक में आ मेरा शुक्रिया अदा किया।

मैं तो ख़ुश था ही और अब किसी दूसरी गोरी की उम्मीद में अपना क्लिनिक चला रहा हूँ।

Tuesday, 12 November 2019

गाँव की गोरी और डॉक्टर की चुदाई -1 (Gaon Ki Gori Aur Doctor ki chudai- part 1)

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गाँव की गोरी को डॉक्टर दिल दे बैठे लेकिन बदकिस्मती से उन्हें दूर दिया पर हालात ऐसे बदले कि साहब को गोरी को इतना करीब लाया कि दोनों दो जिस्म एक जान हो गए..

एमबीबीएस की डिग्री मिलते ही मेरी पोस्टिंग उत्तर प्रदेश के एक गाँव में हो गई। गाँव वासियों ने अपने जीवन में गाँव में पहली बार कोई डॉक्टर देखा था। इसके पहले गाँव नीम हकीमों, ओझाओं और झाड़ फूँक करने वालों के हवाले था।

जल्द ही गाँव के लोग एक भगवान की तरह मेरी पूजा करने लग गए, रोज़ ही काफ़ी मरीज़ आते थे और मैं जल्दी ही गाँव की ज़िंदगी में बड़ा महत्वपूर्ण समझा जाने लगा। गाँव वाले अब सलाह के लिए भी मेरे पास आने लगे। मैं भी किसी भी वक़्त मना नहीं करता था अपने मरीज़ों को आने के लिए!

गाँव के बाहर मेरा बंगला था। इसी बंगले में मेरी डिस्पेन्सरी भी थी। गाँव में मेरे साल भर गुज़ारने के बाद की बात होगी यह। इस गाँव में लड़कियाँ और औरतें बड़ी सुन्दर सुन्दर थीं। ऐसी ही एक बहुत ख़ूबसूरत लड़की थी गाँव के मास्टर जी की।

नाम भी उसका था गोरी। सच कहूँ तो मेरा भी दिल उस पर आ गया था पर होनी को कुछ और मंज़ूर था। गाँव के ठाकुर के बेटे का भी दिल उस पर आया और उनकी शादी हो गई। पर जोड़ी बड़ी बेमेल थी। कहाँ गोरी और कहाँ राजन!

राजन बड़ा सूखा सा मारियल सा लड़का था। मुझे तो उसके मर्द होने पर भी शक़ था। और यह बात सच निकली क़रीब क़रीब!

उनकी शादी के साल भर बाद एक दिन ठकुराइन मेरे घर पर आई, उसने मुझे कहा कि उसे बड़ी चिंता हो रही है कि बहू को कुछ बच्चा वगैरह नहीं हो रहा।
उसने मुझसे पूछा कि क्या गड़बड़ हो सकता है, बेटा-बहू उसे कुछ बताते नहीं हैं और उसे शक है कि बहू कहीं बाँझ तो नहीं?

मैंने उसे ढांढस दिया और कहा कि वो बेटा-बहू को मेरे पास भेज दें तो मैं देख लूंगा कि क्या गड़बड़ है।
उसने मुझसे आग्रह किया मैं यह बात गुप्त रखूँ, घर की इज़्ज़त का मामला है।

फिर एक रात क़रीब शाम को वे दोनों आए. राजन और उसकी बहू। देखते ही लगता था कि बेचारी गोरी के साथ बड़ा अनयाय हुआ है कहाँ वो लंबी, लचीली एकदम गोरी लड़की, भरे पूरे बदन की बला की ख़ूबसूरत लड़की और कहाँ वो राजन, काला कलूटा मारियल सा।
मुझे राजन की किस्मत पर बड़ा रंज हुआ।

वे धीरे धीरे अक्सर इलाज करवाने मेरे क्लिनिक पर आने लगे और साथ साथ मुझसे खुलते गये.
राजन बड़ा नर्म दिल इंसान था। अपनी बला की ख़ूबसूरत बीवी को ज़रा सा भी दु:ख देना उसे मंज़ूर ना था।

उसने दबी ज़ुबान से स्वीकार किया एक दिन कि अभी तक वो अपनी बीवी को चोद नहीं पाया है, मैं समझ गया कि क्यों बच्चा नहीं हो रहा है. जब गोरी अभी तक कुंवारी ही है तो!

सहसा मेरे मन मैं एक ख्याल आया और मुझे मेरी दबी हुई हसरत पूरी करने का एक हसीन मौक़ा दिखा; गोरी का कौमार्य लूटने का। दरअसल जब जब राजन गोरी के सुन्दर नंगे जिस्म को देखता था अपने ऊपर काबू नहीं रख पाता था और इससे पहले की गोरी सेक्स के लिए तैयार हो राजन ऊपर टूट पड़ता था।

नतीजा यह कि लण्ड घुसाने की कोशिश करता था तो गोरी दर्द से चिल्लाने लगती थी और गोरी को यह सब बड़ा तकलीफ़ वाला मालूम होता था। उसे चिल्लाते देख बेचारा राजन सब्र कर लेता था फिर। दूसरे राजन इतना कुरूप सा था कि उसे देख कर गोरी बुझ सी जाती थी।

सारी समस्या जानने के बाद मैंने अपना जाल बिछाया। मैंने एक दिन ठकुराईन और राजन को बुलाया, उन्हें बताया कि ख़राबी उनके बेटे में नहीं बल्कि बहू में है और उसका इलाज करना होगा। छोटा सा ऑपरेशन बस… बहू ठीक हो जाएगी।

ठकुराईन तो खुश हो गई पर बेटे ने बाद में पूछा- डॉक्टर साहब। आख़िर क्या ऑपरेशन करना होगा?
“हाँ राजन, बताना ज़रूरी है, नहीं तो बाद मैं तुम कुछ और समझोगे।”
“हाँ! हाँ! बोलिये डॉक्टर साहब?”
“देखो राजन, तुम्हारी बीवी का गुप्ताँग थोड़ा सा खोलना होगा ऑपरेशन करके! तभी तुम उससे संभोग कर पाओगे और वो माँ बन सकेगी।”
“क्या? पर क्या यह ऑपरेशन आप करेंगे। मतलब मेरी बीवी को आपके सामने नंगी लेटना पड़ेगा?”
“हाँ यह मजबूरी तो है, पर तुम तभी उसकी जवानी का मज़ा लूट पाओगे, वरना सोच लो यूँ ही तुम्हारी उमर निकल जाएगी और वो कुँवारी ही रहेगी।”

अब वो नर्म पड़ गया- प्लीज! डॉक्टर साहब, कुछ भी कीजिए, चाहे ऑपरेशन कीजिए, चाहे जो जी आए कीजिए, पर कुछ ऐसा कीजिए कि मैं उसके साथ वो सब कर सकूँ और हमारा आँगन बच्चे की किलकारी से गूँज उठे। वरना मैं तो गाँव में मुँह नहीं दिखा सकूंगा किसी को! खानदान की इज़्ज़त का मामला है डॉक्टर साहब।
उसने हाथ जोड़ लिए.

“ठीक है! घबराओ नहीं, बहू को मेरे क्लिनिक में भरती कर दो। दो चार दिन में जब वो ठीक हो जाएगी तो घर आ जाएगी। तो बस फिर बहू के साथ मौज करना।”
“ठीक है डॉक्टर साहब, वो ठीक हो जाएगी तो मैं आपका बड़ा उपकार मानूंगा।”

और इस तरह गोरी मेरे घर पर आ गई, कुछ दिनों के लिए शिकार जाल में था, बस अब करने की बारी थी।

गोरी अच्छी मिलनसार थी, खुल सी गई थी मुझसे। पर जब वो सामने होती थी अपने ऊपर काबू रखना मुश्किल हो जाता था। बला की कमसिन थी वो, जवानी जैसे फूट फूट कर भरी थी उसके बदन में ज़ब्त किए था। मैं मौक़ा देख रहा था, महीनों से कोई लड़की मेरे साथ नहीं सोई थी।

लण्ड था कि नारी बदन देखते ही खड़ा हो जाता था। दूसरी गड़बड़ यह थी मेरे साथ कि मेरा लण्ड बहुत बड़ा है जब वो पूरी तरह खड़ा होता है तो क़रीब 8″ लंबा होता है और उसका सुपारा ऐसे कड़ा हो जाता है जैसे कि एक लाल बड़ा सा टमाटर हो। और पीछे लंबा सा, पत्थर की तरह कड़ा एकदम सीधा लंबा सा खीरे जैसा मोटा सा लण्ड!

गोरी को मेरे घर आए एक दिन बीत चुका था। पिछली रात तो मैंने किसी तरह गुज़ार दी पर दूसरे दिन बदहवास सा हो गया और मुझे लगा कि अब मुझे गोरी चाहिए वरना कहीं मैं कुछ कर ना बैठूं।
ऐसी सुन्दर कामनीय काया मेरे ही घर में और मैं प्यासा!

क्लिनिक बंद करके रात्रि भोजन के बाद मैंने गोरी से कहा कि मुझे उससे कुछ ख़ास बातें करनी हैं उसके केस के बारे में! कि वो अंदर मेरे रूम में आ जाए।

गाँव की एक वधू की तरह वो मेरे सामने बैठी थी। एक भरपूर नज़र मैंने उस पर डाली, उसने नज़रें झुका ली। अब मैंने बेरोक टोक उसके जिस्म को अपनी नज़रों से टटोला। उफ़्फ़्फ़!! कपड़ों में लिपटी हुई भी वो कितनी कामवासना जगाने वाली थी।

“देखो गोरी मैं जानता हूँ कि जो बातें मैं तुमसे करने जा रहा हूँ, वो मुझे तुम्हारे पति की अनुपस्थिति में शायद नहीं करनी चाहिए, पर तुम्हारे केस को समझने के लिए और इलाज के लिए मेरा जानना ज़रूरी है, और अकेले में मुझे लगता है कि तुम सच सच बताओगी। मैं जो पूछूँ, उसका ठीक ठीक जवाब देना।”

“तुम्हारे पति ने मुझे सब बताया है और उसने यह भी बताया है कि क्यों तुम दोनों का बच्चा नहीं हो रहा है।”
“क्या बताया उन्होंने डॉक्टर साहब?”
“राजन कहता है कि तुम माँ बनने के काबिल ही नहीं हो।”
“वो तो डॉक्टर साहब, वो मुझसे भी कहते हैं और जब मैं नहीं मानती तो उन्होंने मुझे मारा भी है एक दो बार।”
“तो तुम्हें क्या लगता है कि तुम माँ बन सकती हो?”

“हाँ! डॉक्टर साहब, मेरे में कोई कमी नहीं है। मैं माँ बन सकती हूँ।”
“तो क्या राजन में कुछ ख़राबी है।”
“हाँ! डॉक्टर साहब, क्या? साहब वो … वो … उनसे होता नहीं।”
“क्या नहीं होता राजन से?”
“वो साहब … वो …”
“हाँ हाँ, बोलो गोरी, देखो मुझसे कुछ छुपाओ मत! मैं डॉक्टर हूँ और डॉक्टर से कुछ छुपाना नहीं चाहिए।”
“डॉक्टर साहब, मुझे शरम आती है कहते हुए! आप पराये मर्द हैं ना।”

मैं उठा, कमरे का दरवाज़ा बंद करके खिड़की में भी चिटकनी लगा के मैंने कहा- लो अब मेरे अलावा कोई सुन भी नहीं सकता … और मुझसे तो शरमाओ मत, हो सकता है तुम्हारा इलाज करने के लिए मुझे तुम्हें नंगी भी करना पड़े। तुम्हारी सास और पति से भी मैंने कह दिया है और उन्होंने कहा है कि मैं कुछ भी करूँ पर उनके खानदान को बच्चा दे दूं इसलिए मुझसे मत शरमाओ।” “डॉक्टर साहब, वो मेरे साथ कुछ कर नहीं पाते।”
“क्या?” मैं अनजान बनते हुए कहा। मुझे गोरी से बात करने में बड़ा मज़ा आ रहा था। मैं उस गाँव की युवती को कुछ भी करने से पहले पूरा खोल लेना चाहता था।

“वो … वो मेरे साथ मेरी योनि में डाल नहीं पाते।”
“ओह … यूँ कहो ना कि वो तुम्हारे साथ संभोग नहीं कर पाते।”
“हाँ, राजन कह रहा था कि तुम्हारी योनि बहुत संकरी है।”
“तो क्या आज तक उसने कभी भी तुम्हारी योनि में नहीं घुसाया?”
“नहीं डॉक्टर साहब!” नज़र झुकाए ही वो बोली।

“तो क्या तुम अभी तक कुँवारी ही हो? तुम्हारी शादी को तो साल भर से ज़्यादा हो चुका है.”
“हाँ साहब! वो कर ही नहीं सकते, मैं तो तड़पती ही रह जाती हूँ।” यह कहते कहते गोरी रुआंसी हो उठी।
“पर वो तो कहता है कि तुम सह नहीं पाती हो? और चीखने लगती हो, चिल्लाने लगती हो।”
“साहब वो तो हर लड़की पहली बार चीखती, चिल्लाती है। पर मर्द को चाहिए कि वो उसकी एक ना सुने और अपना काम करता रहे। पर ये तो कर ही नहीं सकते, इनके उसमें ताक़त ही नहीं है इतनी … सूखे से तो हैं।”

“पर वो तो कहता है कि तुमको संभोग की इच्छा ही नहीं होती?”
“झूठ बोलते हैं साहब! किस लड़की की इच्छा नहीं होती कि कोई बलिष्ठ मर्द आए और उसे लूट ले, पर उन्हें देख कर मेरी सारी इच्छा ख़त्म हो जाती है।”

“पर गोरी मैंने तो उसका काम अंग देखा है, ठीक ही है और वो संभोग कर तो सकता है. कहीं तुम्हारी योनि में ही तो कुछ समस्या नहीं?”
“नहीं साहब नहीं, आप उनकी बातों में ना आइए, पहले तो हमेशा मेरे आगे पीछे घूमते थे कि मुझसे सुन्दर गाँव में कोई नहीं! और अब!” वो सुबकने लगी।
“आप ही बताइए डॉक्टर साहब, मैं शादी के एक साल बाद भी कुँवारी हूँ और फिर भी उस घर में सभी मुझे ताना मारते हैं।”
“अरे नहीं गोरी.” मैंने प्यार से उसके सर पर हाथ फेरा- अच्छा! मैं सब ठीक कर दूँगा।

“अच्छा चलो यहाँ बिस्तर पर लेट जाओ, मुझे तुम्हारा चेकअप करना है।”
“क्या देखेंगे डॉक्टर साहब?”
“तुम्हारे बदन की जाँच तो करनी होगी।”
“जीईई? ऊपर से ही देख लीजिए ना डॉक्टर साहब! जो देखना है ऊपर से!”

“तुम तो बहुत खूबसूरत लगती हो, एकदम काम की देवी! तुम्हें देख कर तो कोई भी मर्द पागल हो जाए। फिर मुझे देखना यह है कि आज तक तुम कुँवारी कैसे हो। चलो लेटो बिस्तर पर और साड़ी उतारो।”
“जजज्ज़ई डॉक्टर साहब। मु… मुझे शर्म आती है!”
“डॉक्टर से शरमाओगी तो इलाज कैसे होगा?”

वो लेट गई, मैंने उसे साड़ी उतारने में मदद की। एक खूबसूरत जिस्म मेरे सामने सिर्फ़ ब्लाउज और पेटीकोट में था लेटा हुआ वो भी मेरे बिस्तर पर … मेरे लंड में हलचल होने लगी, मैंने उसका पेटीकोट थोड़ा ऊपर को सरकाया और अपना एक हाथ अंदर डाला।
वो उधर नंगी थी। एक उंगली से उसकी चूत को सहलाया, वो सिसकी और अपनी जाँघों से मेरे हाथ पर हल्का सा दबाव डाला। उसकी चूत के होंठ बड़े टाइट थे, मैंने दरार पर उंगली घुमाने के बाद अचानक उंगली अंदर घुसा दी।
वो उछली हल्की सी … एक सिसकारी उसके होंठों से निकली।

थोड़ी मुश्किल के बाद उंगली तो घुसी। फिर मैंने उंगली थोड़ी अंदर बाहर की। वो भी साल भर से तड़प रही थी, मेरी इस हरकत ने उसे थोड़ा गर्मी दे दी।
इसी बीच एक उंगली से उसे छेड़ते हुए मैंने बाक़ी उंगलियाँ उसकी चूत से गांड के छेद तक के रास्ते पर फिरानी शुरू कर दी थी।

“कैसा महसूस हो रहा है? अच्छा लग रहा है?”
“हाँ! डॉक्टर साहब।”
“तुम्हारा पति ऐसा करता था? तुम्हारी योनि में इस तरह उंगली डालता था?”
“नहीं डॉक्टररर साहब्ब…” गोरी अब छटपटाने लगी थी, उसकी आँखें लाल हो उठी थी।

“अगर तुम्हारे साथ संभोग करने से पहले तुम्हारा पति ऐसा करे तो तुम्हें अच्छा लगेगा?”
“हाँ अम्म … वे तो कुछ जानते ही नहीं और सारा दोष मेरे माथे पर ही मढ़ रहे हैं।”
“अगली बार जब अपने पति के पास जाना तो यहाँ योनि पर एक भी बाल नहीं रखना, तुम्हारे पति को बहुत अच्छा लगेगा और वो ज़रूर तुम पर चढ़ेगा।”
“अच्छा डॉक्टर साहब।”
“जाओ उधर बाथरूम में सब काट कर आओ। वहाँ रेजर रखा है। जानती हो ना कि कैसे करना है? संभोग करने से पहले इसे सज़ा कर अपने पति के सामने पेश करना चाहिए।”
मैंने गोरी की चूत को खोदते हुए उसकी आँखों में आँखें डाल कहा।
“हाँ। डॉक्टर साहब, लेकिन उन्होंने तो कभी भी मुझे बाल साफ़ करने के लिए नहीं कहा।” गोरी ने धीरे से कहा।

वो गई और थोड़ी देर में वापस मेरे बेडरूम में आ गई।
“हो गया?”
“तो तुम्हें रेजर इस्तेमाल करना आता है, कहीं उस नाज़ुक जगह को काट तो नहीं बैठी हो?” मैंने पूछा।

“जी जी कर दिया, शादी से पहले मैंने कई बार रेजर पहले भी इस्तेमाल किया है।”
“अच्छा आओ फिर यहाँ लेट जाओ।”

वो आई और लेट गई, पिछली बार से इस बार प्रतिरोध काम था।
मैंने उसके पेटीकोट का नाड़ा पकड़ा और खींचना शुरू किया, पेटीकोट खुल गया। उसकी कमर मुश्किल से 22 इंच रही होगी और हिप्स की साइज क़रीब 34 इंच। जाँघों पर ख़ूब मांसलता थी, गोलाई और मादकता। विशाल पुट्ठे इस सुन्दर कामुक दृश्य ने मेरा स्वागत किया।

उसने मेरा हाथ पकड़ लिया- डॉक्टर साहब, ये क्या कर रहे हैं? आप तो मुझे नंगी कर रहे हैं!
“अरे देख तो लूं कि तुमने बाल ठीक से साफ़ किए भी या नहीं! और बाल काटने के बाद वहाँ पर एक क्रीम भी लगानी है।”

अब इससे पहले वो कुछ बोलती, मैंने उसका पेटीकोट घुटनों से नीचे तक खींच लिया था। अति सुन्दर! बला की कामुक!
“तुम बहुत खूबसूरत हो गोरी।” मैंने थोड़ा साहस के साथ कह डाला।

उसकी तारीफ़ ने उसके हाथों के ज़ोर को थोड़ा काम कर दिया और उसका फ़ायदा उठाते हुए मैंने पूरा पेटीकोट खींच डाला और दूर कुर्सी पर फेंक दिया।
यक़ीन! मानिए मुझे ऐसा लगा कि अभी उस पर चढ़ जाऊं। वो पतला सपाट पेट, छोटी सी कमर पर वो विशाल नितंब। सिर्फ़ एक ब्लाउज पीस में रह गया था उसका बदन! भरपूर नज़रों से देखा मैंने उसका बदन।

उसने शर्म के मारे अपनी आँखों पर हाथ रख लिया और तुरंत पेट के बल हो गई ताकि में उसकी चूत न देख सकूँ।
शायद चूत दिखाने में शर्मा रही थी।

“ज़रा पल्टो गोरी! शर्म नहीं करते. फिर तुम इतनी सुन्दर हो कि तुम्हें तो अपने इस मस्त बदन पर गर्व होना चाहिए।”
“नहीं डॉक्टर साहब, पराए मर्द के सामने मुझे बहुत शर्म आ रही है।”
“पल्टो ना गोरी!” कहकर मैंने उसके पुटठों पर हाथ रखा और बल पूर्वक उसे पलटा। दो खूबसूरत जाँघों के बीच में वो कुँवारी चूत चमक उठी। गोरी गोरी!! चूत की दोनों पंखुड़ियाँ फड़क सी रही थी। शायद उसने भाँप लिया था कि किसी मस्त से लंड को उसकी खुशबू लग गई है, उसकी चूत पर थोड़ी सी लाली भी छाई थी।

इधर मेरे लंड में भूचाल सा आ रहा था और मेरे अंडरवीयर के लिए मेरे लंड को कन्ट्रोल में रखना मुश्किल सा हो रहा था। फिर भी मेरे टाइट अंडरवीयर ने मेरे लंड को छिपा रखा था।
अब मैंने उसकी चूत पर उंगलिया फिराई और पूछा- गोरी, क्या राजन तुम्हें यहाँ पर मेरा मतलब तुम्हारी योनि पर चूमता है?
“नहीं साहब, यहाँ कैसे चूमेंगे?”
“तुम्हारे इन पुटठों पर?” मैंने उसके गांड पर हाथ रख कर पूछा।
“नहीं डॉक्टर साहब, आप कैसी बातें कर रहे हैं।” अब उसकी आवाज़ में एक नशा एक मादकता सी आ गई थी। एक गर्म युवती किसी से चुदने के लिए तैयार थी।
“वो कहाँ कहाँ छूता है तुम्हें?”
“जी, यहाँ पर!” उसने अपने चूची की तरफ़ इशारा किया जो इस गर्म होते माहौल की खुशबू से काफ़ी बड़े हो गयी थी और लगता था कि जल्दी उनको बाहर नहीं निकाला तो ब्लाउज फट जाएगा। उसने कोई ब्रा भी नहीं पहनी थी।

मैं बिस्तर पर चढ़ गया। मैंने दोनों हथेलियाँ उसके दोनों मम्मों पर रखी और उन्हें कामुक अंदाज में मसलना शुरू किया।
वो तड़पने लगी- डॉक्टररर स्साहहाब क्या कर रहे ए ए हैं आप? यह कैसा इलाज आप कर रहे हैं?
“कैसा लग रहा है गोरी? मुझे अच्छी तरह से देखना होगा कि राजन ठीक करता है या नहीं। वह कहता है तुम हाथ लगाते ही ऐसे चीखने लग जाती हो।”
“बहुत अच्छा लग रहा है साहब। पर आप से यह सब करवाना क्या अच्छी बात है?”

मैंने गोरी की बातों पर कोई ध्यान नहीं दिया और उसकी मस्त चूचियाँ दबानी जारी रखी।

“हाँह… आपका इनको हल्के हल्के दबाना बहुत अच्छा लग रहा है।”
“क्या राजन भी ऐसे ही मसलता है तेरे इन खूबसूरत स्तनों को?”
“नहीं साहब, आपके हाथों में मर्दानी पकड़ है।”

मैंने उसे कमर से पकड़ कर उठा लिया, बूब्स के भार से अचानक उसका ब्लाउज फट गया और वो कसे कसे दूध बाहर को उछाल कर आ गये, वाह! क्या ख़ूबसूरत कामुक अप्सरा बैठी थी मेरे सामने एकदम नग्न, 32-22-34 एकदम दूध की तरह गोरी, बला की कमसिन।

मुझसे रुकना मुश्किल हो रहा था, अब मैंने उसके मुख को पकड़ उसके होंठों को चूसना शुरू कर दिया।

इससे पहले वो कुछ समझ पाती, उसके होंठ मेरे होंठो के जकड़ में थे। मेरे एक हाथ ने उसके पूरे बदन को मेरे शरीर से लिपटा लिया था और दूसरे हाथ से ज़बरदस्ती उसकी जाँघों के बीच से जगह बना कर उसके गुप्ताँग में उंगली डाल दी, उसकी क्लिटोरिस पर मैंने ज़बरदस्त मसाज़ की, उसके पुट्ठे उठने लगे थे, वो मतवाली हो उठी थी।

मैंने उसके होंठों को चूमा- कभी राजन ने इस तरह किया तेरे साथ? सच कहना गोरी?
“नहीं डॉक्टर साहब, वे तो सीधे ऊपर चढ़ जाते हैं और थोड़ी देर हिल के सुस्त पड़ जाते हैं।”
“यही तो मुझे देखना है गोरी। राजन कह रहा था कि तुम चिल्लाने लग जाती हो?”
“वो तो मेरी प्यास अधूरी रह जाने के कारण होता था.”
“बहुत अच्छा!”

“पर अब जाँच पड़ताल ख़त्म हो गई क्या डॉक्टर साहब? आप और क्या क्या करेंगे मेरे साथ?”
“अब मैं वही करूँगा जो एक जवान शक्तिशाली मर्द को एक सुन्दर कामुक खूबसूरत बदन वाली जवान युवती, जो बिस्तर पर नंगी पड़ी हो, के साथ करना चाहिए। तेरा बदन वैसे भी एक साल से तड़प रहा है, तेरा कौमार्य टूटने के लिए बेताब है और आज ये मर्दाना काम मेरा काम-अंग करेगा रात भर इस बिस्तर पर!”

मेरी उंगली जो अभी भी उसकी चूत में थी, ने अचानक एक लसलसा सा महसूस किया, यह उसका योनि रस था जो योनि को संभोग के लिए तैयार होने में मदद करता है, मेरी उंगली पूरी भीग गई थी और रस चूत के बाहर बहकर जाँघों को भी भिगो रहा था।

मेरी बात सुनकर उसके बदन में एक तड़प सी हुई चूतड़ ऊपर को उठे और उसके मुंह से एक सिसकी भरी चीख निकल पड़ी। बाद में थोड़ा संयत होकर गोरी बोली- डॉक्टर साहब, पर इससे मैं रुसवा हो जाऊँगी, मेरा मर्द मुझे घर से निकल देगा यदि उसे पता चला कि मैं आप के साथ सोई थी। आप मुझे जाने दीजिए, मुझे माफ़ कीजिये।

“तू मुझे मर्द समझती है तो मुझ पर भरोसा रख, मैं आज तुझे भरपूर जवानी का सुख ही नहीं दूँगा बल्कि तुझे हर मुसीबत से बचाऊँगा। तेरा मर्द तुझे और भी ख़ुशी ख़ुशी रखेगा।”
“वो कैसे डॉक्टर साहब?”
“क्योंकि आज के बाद जब वो तुझ पर चढ़ेगा वो तेरे साथ संभोग कर सकेगा। जो काम वो आज तक नहीं कर पाया तुम दोनों की शादी के बाद … अब कर सकेगा और तब तू उसके बच्चे की माँ भी बन जाएगी।”
“पर कैसे डॉक्टर साहब। कैसे होगा ये चमत्कार! साहब?”
“मेरी प्यारी गोरी!” मैंने उसकी फटी चोली अलग करते हुए और उसके बूब्स को मसलना शुरू करते हुए कहा- तेरी योनि का द्वार बंद है उसे आज में अपने प्रचंड भीषण लण्ड से खोल दूँगा ताकि तेरा पति फिर अपना लण्ड उसमें घुसा सके और अपना वीर्य उसमें डाल सके जिससे तू माँ बन सकेगी।

मेरे मसलने से उसके बूब्स बड़े बड़े होने लगे थे और कठोर भी। उफ़्फ़्!! क्या लगती थी वो अपनी पूरी नग्नता में उन सॉलिड बूब्स पर वो गोल छोटी चूचियां भी बहुत बेचैन कर रही थी मुझे। उसका पूरा बदन अब बुरी तरह तड़प रहा था, नशीले बदन पर पसीने की हल्की छोटी बूँदें भी उभर आई थी। मेरा लण्ड बहुत ही तूफ़ानी हो रहा था और अब उसके आज़ाद होने का वक़्त आ गया था।

“डॉक्टर साहब मुझे बहुत डर लग रहा है, मेरी इज़्ज़त से मत खेलिए ना! जाने दीजिए, मेरा बदन उईइ माँ!”
“मुझ पर यक़ीन करो गोरी … यह एक मर्द का वादा है तुझसे! मैं सब देख लूंगा। तेरा बदन तड़प रहा है गोरी एक मर्द के लिए, तेरी चूत का बहता पानी, तेरे कसते हुए बूब्स साफ़ कह रहे हैं कि अब तुझे संभोग चाहिए।”
“साहब।”
“हाँ गोरी मेरी रानी, बोल?”
“मैं माँ बनूँगी ना?”
“हाँ!”
“मेरा मर्द मुझे अपने साथ रख लेगा ना। मुझे मारेगा तो नहीं ना!”
“हाँ गोरी, तू बिल्कुल चिंता ना कर।”

“तो साहब फिर अपनी फ़ीस ले लो आज रात, मेरी जवानी आपकी है।”
“ओह! मेरी गोरी आ जा!”

Tuesday, 5 November 2019

बुआ के बेटे से चुदाई

By With No comments:
Antarvasna मे आप सभी का स्वागत है. कहानी को पड़े और अन्तर्वासना का मजा लीजिये. और एक बात यदि लंड और चूत को खुजली हो तो दिए गए विडियो को देख कर जरुर आपने लंड और चूत को शांत करे.

कई दिनों से शलाका अपनी ब्रा पैंटी पे अजीब से दाग देख के परेशान थी। उसे समझ में नहीं आ रहा था, कि ये दाग लग कहाँ से रहे हैं।

उस रोज़ शाम क़रीब आठ बजे शलाका नहा कर अपने कपड़े डालने छत पर गई। शलाका अपने कपड़े फैला कर छत पर टहलती हुई कोने में पहुँची।Antarvasna

तभी तेजी से अलीश आया और उसने उसकी गीली ब्रा-पैंटी उठाई और सीढ़ी के पास जाकर उसकी पैंटी सूंघ के उसकी ब्रा पे मुठ मारने लगा। अलीश ने ढेर सारा मुठ उसकी ब्रा के कप में गिर दिया और ब्रा-पैंटी वैसे ही टांग दी और नीचे चला गया।Antarvasna
अलीश ने शलाका को नहीं देखा था।

Antarvasna 



फिर शलाका ने अपनी ब्रा लेकर देखा तो उस पर ढेर सारा चिपचिपा से कुछ लगा हुआ था। शलाका अलीश को सोच के हैरान थी कि उसका भाई ये सब कर रहा है।

असल में शलाका अलीश के मामा की लड़की थी जो बारहवीं के बाद अपनी बुआ के घर बीए की पढ़ाई करने आई थी।

उस दिन की घटना ने शलाका को भी अंदर से हिला के रख दिया था। उसकी आंखों के सामने अपने भाई का लंड नाच रहा था क्योंकि अलीश का लिंग एकदम काला, मोटा और मूसल जैसा लंबा था।
उसने इज़्ज़त के डर से बुआ को कुछ नहीं बोला।Antarvasna 

दिन तेजी के साथ बीत रहे थे और उसके कपड़ों पे दाग़ भी रोज लगते। अब जब भी शलाका झुक कर झाड़ू पोंछा करती तो अलीश चुपके चुपके शलाका के गोरे गोरे दूधों की दरार को घूरता और किसी न किसी बहाने से शलाका को छूने की कोशिश करता।Antarvasna
अलीश शलाका को छूने का कोई बहाना हाथ से नहीं जाने देता।

शलाका भी सब समझ रही थी पर किसी से कुछ कह भी नहीं सकती थी। आखिर कुछ भी हो … अलीश उसका भाई जो था।Antarvasna

एक दिन माँ के कहने पर अलीश बाजार से शलाका के लिए कुछ नए कपड़े ले आया। उसमें 2 चूड़ीदार सलवार कमीज़ और 2 टॉप और लोअर थे।
घर लाकर उसने सब शलाका को दिया और बोला- पहन के बताओ माप सही है ना?
शलाका ने पैकेट लिया और अपने कमरे में चली गई।Antarvasna

उसने सूट पहना तो वो एकदम सही माप में था। पर जब टॉप पहना तो दंग रह गई। टॉप इतना कसा था कि उसका दूध उभर आया। वो शर्म से लाल हो गई।
शलाका कपड़े बदल कर वापस गई और बोली- भैया, सब ठीक है, बस टॉप एक नंबर बड़ा ला दो।Antarvasna
अलीश ने उससे बोला- पगली. तेरे ही साइज का है. और बाकी सब ढीले आयेंगे. अच्छा तू पहन कर दिखा मुझे एक बार!

शलाका ने फिर से वही किया, अपने कमरे में जाकर टॉप पहना और शर्म से लाल होकर भाई के सामने आई।
उभरे हुए दूध देख के अलीश की आँखें चमक उठी और वो बोला- ठीक तो है पगली … अब कितना ढीला लेगी?
शलाका ने संकोच में वो टॉप ले लिया और पहनने लगी।Antarvasna

रोजमर्रा के काम करते वक़्त जब झुकती तो अब उसके दूध पहले से ज्यादा बाहर लटक जाते। अलीश ने भी उसको इसी वजह से तो इतना कसा टॉप दिया था।
पर अब अलीश शलाका की जवानी का स्वाद लेने के लिए उतावला था। बस शलाका की एक गलती उसकी बुर मरवा सकती थी.Antarvasna
और शायद शलाका भी ये बात जान चुकी थी. इसलिए वो कोई गलती नहीं करना चाहती थी। अलीश ने भी सारी तैयारी कर रखी थी बस कमी थी तो शलाका की।Antarvasna

शलाका का शहर आने के दो कारण थे, पहला अपनी पढ़ाई और दूसरा अपनी बुआ(अलीश की माँ) का ख्याल रखना! उसकी बुआ की तबीयत इन दिनों ज्यादा खराब थी, हाई ब्लड प्रेशर और शूगर की वजह से शरीर में सूजन आ गई थी इसलिए घर का काम शलाका ही करती।Antarvasna

एक दिन रसोई में शलाका खाना बना रही थी। मई का महीना था और गैस की गर्मी के कारण शलाका पसीने से भीगी हुई थी।Antarvasna
तभी अचानक अलीश ने पीछे से आकर उसको बांहों में पकड़ा और बोला- क्या बना रही हो?
शलाका ने जवाब दिया- सब्जी रोटी!

इस बातचीत के बीच शलाका के पसीने की मादक ख़ुशबू से अलीश का लंड तन गया और शलाका अपने कूल्हों की दरार के ऊपर भइया के लंड को साफ महसूस कर रही थी।Antarvasna

फिर अलीश उसके कूल्हे पे और दबाव डाल के बोला- कभी अपने हाथों से खिला भी दो!
इतना कहकर अलीश ने शलाका की पसीने से भीग गर्दन को चूमा और वहाँ से चला गया।

पर इस चुम्बन और लिंग की चुभन ने शलाका की दबी हुई आंतरिक वासना को चिंगारी दे दी थी। शलाका भी कोई अंजान नहीं थी। गांव से ताल्लुक होने की वज़ह से औरत मर्द के रिश्तों की उसे पूरी जानकारी थी। गांव में लड़कियों की शादी जल्दी हो जाती है।Antarvasna

इस सुखद कामुक अहसास को शलाका दुबारा महसूस करना चाहती थी। अब शलाका भी अलीश को पूरा समर्थन दे रही थी।Antarvasna

उस दिन अचानक बारिश होने लगी, वो सूखे कपड़े उतारने के लिए छत पे भागी और अलीश उसके पीछे भागा। कपड़े उतार के उसने सीढ़ी पे रख दिये। अचानक चुपके से अलीश ने उसको पीछे से पकड़ा और बारिश में खेलने के लिए बाहर की ओर उठा के लाया।
भीगने की वजह से उसका टॉप उसके शरीर से चिपक गया।Antarvasna

यह देख कर अलीश के अंदर मस्ती की लहर दौड़ उठी और वो शलाका को अपने बदन से चिपका कर खेलने लगा, उसे बांहों में भर कर उसको गोल गोल घुमाता। दोनों की छाती एक दूसरे से चिपक जाती और शरीर की गर्मी भड़क उठती।
छत पर थोड़ा पानी भरा हुआ था। अलीश शलाका को लेकर उस पानी में लेट गया और दोनों लोटने लगे। कभी अलीश शलाका के ऊपर तो कभी शलाका। शलाका के दूध को दबाने की हर मुमकिन कोशिश की अलीश ने।
झमाझम बारिश में दोनों भाई बहन जम के भीगे।

शलाका ने ब्रा नहीं पहनी हुई थी जिसकी वजह से उसके दूध की घुंडी साफ दिख रही थी। सख्त घुंडी देख के अलीश जम के शलाका के साथ खेला।

फिर दोनों नीचे आये और शलाका बाथरूम में कपड़े बदलने गई।

Antarvasna -  सगी बहन की चुदाई की कहानी

जब अलीश कपड़े बदलने गया तो वहां शलाका की गीली पैंटी पड़ी थी. शायद शलाका ने अपनी पैंटी को जानबूझकर ऊपर रखा हुआ था।
अलीश ने उसकी पैंटी को पहले अच्छे से सूँघा और फिर मुठिया मारकर ढेर सारा रस उसी में डाल दिया।

फिर जब शलाका अपने कपड़े छत पर डालकर आई तो अलीश की तरफ घूर के देखा और फिर हल्का सा मुस्कुराई। अलीश को पूरा यकीन हो गया कि अब ये मुझसे चुदने को पूरी तरह से तैयार है।
रात को 11 बजे अलीश माँ के कमरे में गया। माँ खाना और दवाई खाकर सो चुकी थी। अब सिर्फ शलाका और अलीश ही जाग रहे थे।

शलाका बहुत धीरे धीरे बात कर रही थी अलीश से … पर अलीश को पता था कि अब वो कुछ भी कर ले पर माँ सुबह से पहले नहीं उठने वाली।

अलीश ने शलाका को कहा- मेरे कमरे में चल।
शलाका को अलीश अपने कमरे में लेकर गया और दरवाज़ा बंद कर लिया।

अलीश ने शलाका के साथ बेड पे लेट और धीरे से अपने पैर से उसके पैर को सहलाना शुरू कर दिया। शलाका ने कोई प्रतिक्रिया नहीं की पर अलीश से बात करती रही।
अलीश एक हाथ उसके सर के ऊपर से ले जाकर उसके कंधे पर रखा और हल्के हल्के से उसके कंधे को सहलाने लगा। शलाका ने अलीश की तरफ अपनी कातिल नज़र डाली और मुस्कराने लगी।
इधर अलीश के हाथों ने अपना करतब दिखाना शुरू कर दिया। अलीश ने धीरे धीरे से अपनी उंगलियां उसके गले पर फिरानी शुरू कर दी।
शलाका की साँसें एकदम तेज हो रही थी, वो बस अपनी कातिल निगाहों से अलीश को देखे जा रही रही थी।

जैसे ही अलीश अपने हाथ को हल्के से उसके टॉप के अन्दर डाला और उसक दाहिने तरफ के उरोज की घुंडी पर अपनी उंगली फिराई तो उसे ऐसा लगा जैसे वो किसी हसीन ख्वाब से बाहर आई। उसने अलीश का हाथ पकड़ा और बाहर करते हुए बोली- बुआ आ जाएंगी।

अलीश कुछ नहीं बोला और एकदम से उसके होंठों को अपने होंठों की गिरफ्त में ले लिया।

एक बार तो उसकी आँखें बड़ी हो गयी पर फिर धीरे धीरे वो भी इस पहली चुम्बन के रोमांच में खोने लगी। साँसें उखड़ने तक वो दोनों एक दूसरे के होंठों को ऐसे ही चूसते रहे।

जब चुम्बन करके दोनों अलग हुए तो अलीश ने शलाका से कहा- मैं तुमको जी भरकर प्यार करना चाहता हूँ.
यह सुनकर शलाका सीधे अलीश गले लग गयी और बोली- भईया, मैं आपको बहुत पसंद करती हूँ. पर डर के मारे कभी कह न सकी।
ऐसा कहकर वो अलीश को बेतहाशा चूमने लगी कभी गालों पर, माथे पर, गले पर और फिर अपने होंठों को अलीश के होंठ पे रख दिये।

अलीश उसके होंठों को चूमते हुए उसके दूध को टॉप के ऊपर से ही दबाने लगा. फिर वो अपनी बहन का टॉप निकालने लगा तो उसने साथ दिया। काले रंग की ब्रा में गोरी गोरी दूध के अलीश मस्त हो गया।

अलीश ने फ़ौरन अपनी बहन के स्तनों को उसकी ब्रा से आज़ाद कर दिया और बारी बारी से उसके दूध को मसलकर जमकर चूसा।
शलाका के बूब्स के निप्पल मस्ती से सख्त हो चुके थे।

अलीश उसकी घुंडी पे जीभ फेरता तो कभी दांतों में हल्के हल्के भींच कर खूब खींचता।
शलाका की सिसकारियों से माहौल और भी मस्त होता जा रहा था।

फिर अलीश ने उसको बेड पर पीठ के बल लिटाकर, उसके पेट नाभि को चूमते हुए उसकी बुर की तरफ बढ़ना शुरू किया, उसके पजामे और पैंटी को एक ही बार में निकाल दिया।

अलीश उसके पैरों को चूमते हुए उसकी बुर तक पहुँच गया। एकदम चिकनी गोरी सी बुर जिस पर छोटे छोटे बाल थे, हल्की हल्की गीली होने की वजह से एकदम चमक रही थी।
अलीश सीधा उसकी बुर चूसने, चाटने लगा।

शलाका के मुँह से तेज सिसकारियाँ निकलने लगी ‘ऊह्ह्ह उम्म्ह… अहह… हय… याह… माम्माह हमहा…’

अलीश ने जी भरकर अपनी बहन की बुर को चाटा और अपनी जीभ से उसकी बुर चुदाई भी की. आखिरकार शलाका की कुंवारी बुर ने अपना पहला पानी छोड़ दिया।

अब अलीश ने उसे अपना 7 इंच का औज़ार दिखाया और उसे चूसने को कहा। बिना किसी नखरे के शलाका ने औज़ार को अच्छे से चूस कर गीला किया।

अलीश ने उसे सीधे लिटाकर अपनी बहन शलाका के दोनों पैरों को ऊपर किया जिससे उसकी बुर खुलकर सामने आ गयी। फिर अलीश ने अपना लंड उसकी चिकनी बुर पर रखा, छेद पे लगाकर पहले ही झटके में आधा लंड अन्दर उसकी बुर में ठूंस दिया।

18-19 साल की लड़की की बुर में अलीश का लण्ड एक गर्म मूसल की तरह था, वो दर्द से बिलबिला उठी, उसकी चीख निकल गयी। उसने अलीश को अपने ऊपर से हटाने की नाकामयाब कोशिश की पर हटा न सकी।

कुछ देर के लिए अलीश रुक गया और उसके मुँह जोर से दबा कर दुबारा लंड इतना बाहर निकाला कि बस उसकी टोपी शलाका की बुर में थी। दो तीन बार इसी तरह करने से उसने शलाका की बच्चेदानी तक अपना लंड डाल दिया और फिर थोड़ा रुक गया।

शलाका दर्द से रो रही थी। अलीश रुका हुआ था और उसके कान में बोला- पगली, बस आज ही ये दर्द होगा, उसके बाद कभी नहीं होगा।
2 मिनट तक तक अलीश उसके गले और दूध को चूमता रहा ताकि लंड का तनाव बना रहे।

जब थोड़ी देर में शलाका शांत हुई तो अलीश ने फिर तेज़ी से झटके मारने शुरू किये। पांच मिनट तक धक्के देने के बाद शलाका के शरीर की भूख जगी और अब पूरी तरह से अपने भाई अलीश का साथ दे रही थी।
अलीश ने अपनी बहन के दूध को मसलते हुए, अपने झटकों में और तेजी लानी शुरू की।

शलाका नागिन की तरह उससे लिपट गई और दोनों पैरों से अलीश की कमर को जकड़ लिया।

आधे घंटे के बाद अलीश ने ढेर सारा पानी शलाका की बुर में भर दिया।Antarvasna

दोनों ने उस रात कई बार ये खेल खेला अगले दिन अलीश ने शलाका को गर्भनिरोधक दवा खिलाई ताकि बच्चा न रुके।

उस दिन के बाद दोनों भाई बहन कंडोम लगा कर एक दूसरे के साथ संबंध बनाते थे। पर हर 15 दिन पे बिना कंडोम के शारीरिक संबंध बनाते ताकि दोनों का पानी एक दूसरे के शरीर को लगे।
दोनों दो साल से एक दूसरे के साथ इसी तरह सेक्स में रत रहते रहे

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Thursday, 31 October 2019

सगी बहन की चुदाई की कहानी

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Antarvasna sex stories मे आप सभी का सवागत है. क्या आपलोग कभी भी आपनी सगी बहन की चुदाई की है. मुझे जरुरु कमेंट करके बताना. मैंने तो जमकर आपनी सगी बहन की चुदाई की और मुझे जो अनुभाव हुआ में आपनी कहानी में बताऊ गा. और एक बात निचे दिए गए सेक्स विडियो देखना ना भूले.

दोस्तों मैं नितिन अपनी एक सच्ची बहन भाई की चुदाई की कहानी लेके आपके सामने आया हु। मैं पटना का रहने वाला हु। मेरे माँ और पापा दोनों जॉब करते है। एक फ़ौज में है और माँ का भी काम टूरिंग का है वो भी ऐसे सरकारी कर्मचारी ही पर वो हमेशा सरकार के ग्रामीण एरिया में काम करती है और कई बार वो 10 दिन तक भी बाहर रहती है। Antarvasna sex stories


हम दोनों  घर पर अकेले ही रहते है। जब से जिओ का इंटरनेट आया है हम दोनों ने एक एक मोबाइल लिए ताकि पापा और मम्मी को कह सकें की हम दोनों यूट्यूब से पढाई करते हैं।  सच तो ये है हम बूर का फिल्म देखते है और मेरी बहन लौड़े का। एक दिन की बात है मैं अपने दोस्तों के यहाँ गया है जन्मदिन पर आते रात हो गई थी।  जब घर आया तो दरवाजा खुद ही खोल लिया था क्यों की मुझे जुगाड़ पता है बाहर से भी खोल लेता हु।  और चुपके से अंदर गया सोचा की अपने बहन को डराउँगा और धीरे धीरे अंदर पहुंच गया। वह जाकर देखा तो मेरे होश उड़ गए। वो नंगी थी दोनों पैर फैलाई हुई थी। चूचियां बड़ी और गोल गोल खुद ही मसल रही थी। और आह आह उफ़ उफ़ उफ़ की आवाज निकाल रही थी और अपने मोबाइल पर सेक्सी फिल्मे देख रही थी।  जिसमे एक गोरा एक गोरी लड़की को चोदे जा रहा था और जैसे जैसे फिल्म में लड़की आवाज निकाल रही थी मेरी बहन भी वैसी ही आवाज निकाल रही थी।Antarvasna sex stories


पहले तो मैं चुपचाप नजारा देख रहा था वो कान में लिड लगा रखी थी और आह आह कर रही थी। मैं खड़ा था साइड में और देख रहा था मेरी धड़कन बढ़ गई थी। मैं अपना लौड़ा अपने हाथ में ले लिया था और हिलाने लगा और मेरी भी सिसकियाँ निकलने लगी थी।  मेरी बहन अपने बूर में ऊँगली डाल दी और आह आह आह चोद दो मुझे नितिन चोद दो मुझे।  भाई हो तो क्या है मेरे सपने में तुम ही आते हो।  मैं समझ गया वो मुझे ही याद करके अपने बूर में ऊँगली कर रही थी।  मुझसे रहा नहीं गया और उसके सामने नंगा ही खड़ा हो  गया वो देख कर अचानक खड़ी हो गई और डर गई मैंने कहा डरो मत, वो कहने लगी भैया प्लीज मम्मी पापा को मत कहना।

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मैंने कहा देख बहन मैं भी प्यासा हु और तुम भी प्यासी हो, क्यों ना हम दोनों आपस में ही रिश्ता रख लें घर का माल घर में रह जाये इससे बढ़िया और कुछ भी नहीं हो सकता है इसलिए हम दोनों आपस में ही सम्बन्ध बना लें ताकि बाद में पढाई में मन लगे और पापा मम्मी के सपने को भी साकार कर सकें नहीं तो होगा यही मैं तेरे याद में मूठ मारुं और तुम मेरी याद में अपने बूर में ऊँगली करो क्या फायदा। इतना कहते ही मेरी बहन बोल उठी और ये बात कभी मम्मी पापा को पता चला तो? तो मैं बोला क्या तुम मम्मी पापा को अपनी चुदाई की कहानी बताने बाली हो तो उसने कहा नहीं।  तो मैंने कहा फिर कैसे पता चलेगा? वो समझ गई बोली ठीक है। फिर वो बोली अगर हम दोनों ऐसे ही चुदाई करेंगे तो मैं गर्भवती हो सकती हु। तो भाई बोला मैं तेरे लिए मेडिकल से टेबलेट ला दूंगा वो खा लेना फिर कोई दिक्कत नहीं।Antarvasna sex stories

दोस्तों फिर क्या था वो मेरे में लिपट गई और मैं भी अपने बहन में लिपट गया. मैं चूचियां दबाने लगा वो मेरे लौड़े को सहलाने लगी। धीरे धीरे हम दोनों वाइल्ड हो गए और मैं फिर अपने बहन का बूर चाटने लगा और फिर गांड में ऊँगली करने लगा।  वो खूब मजे लेने लगी उसने अपने बाल खोल दिए वो गजब की लग रही थी।  फिर मैं उसको बेड लिटा दिया और अपना लौड़ा उसके बूर पर लगा कर अंदर पेल दिया।Antarvasna sex stories

वो दर्द से कराह उठी, वो बोली लौड़ा पहली बार डलवाई हु अपने बूर में इससे पहले तो ऊँगली से ही काम चला रही थी। दोस्तों आप ये कहानी नॉनवेज स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं। उसके बाद फिर क्या था दोस्तों मैं जोर जोर से अपने लौड़े को अपने बहन के बूर में डालने और वो भी अपने गांड को उठा उठा कर चुदबाने लगी।  करीब एक घंटे तक चोदने के बाद मैं झड़ गया और वो भी शांत हो गई। फिर हम दोनों साथ में नहाये मैंने उसके चूचियों पर खूब साबुन लगाया और बूर में ऊँगली किया और साबुन लगाया।  हम दोनों फिर से तैयार हो गए और अब हम दोनों बाथरूम में ही सेक्स करने लगे, अब तो और भी मज्जा आने लगा। इस तरह रात भर मैं अपने बहन को चोदा।
Antarvasna sex stories - ट्रैन में मामा से चुद गई

दूसरे दिन मैं अपने बहन को टेबलेट ला के दिए वो खा ली और फिर कहने लगी नितिन तुमने मेरी बूर फाड़ दिया , मेरी बूर काफी सूज गई है।  बहुत दर्द कर रहा है। मैंने कहा तुम भी तो आह आह करके चुदवा रही थी। फिर हम दोनों हसने लगे अब हम दोनों भाई बहन रोज रोज चुदाई करते हैं।  आपको ये कहानी कैसी लगी कमेंट जरुर करें।Antarvasna sex stories

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Wednesday, 30 October 2019

ट्रैन में मामा से चुद गई

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Antarvasna सेक्स स्टोरीज मे आप लोगो का हार्दिक स्वागत करती हु. मामा से मेरी चुदाई आप लोगो को कैसी लगी कहानी पड़ने के बाद जरुरु बताना. और कमेंट जरुरु करना. क्या आप लोग भी सेक्स करना चाहते है तो जरुरु कमेंट करे . और एक बात निचे दिए गए चुदाई के विडियो को देखना ना भूले.  Antarvasna

कभी कभी रावण भी राम लगने लगता है जब वो रावण सुख दे, चुदाई की प्यासी बेलगाम लड़की 18 साल की चुदने को आतुर पर वैसा मौक़ा नहीं मिला की अपनी चूत की गर्मी को शांत कर सकूँ, पर मुझे ख़ुशी है की मैं चुदी वो भी अपने रिश्तेदार से ही और वो भी मामा जी से ट्रैन में अपने माँ के सामने। आज मैं आपको पूरी कहानी बताने जा रही है ट्रैन में कैसे मेरे चूत की गर्मी शांत हुई. Antarvasna


मैं पटना जा रही थी। ट्रैन में टिकट नहीं मिल रहा था हम लोग दिल्ली में रहते हैं। मैं मां और मामाजी तीनो ट्रैन में थे ऐसी थ्री टियर में। मां और म म मामा जी के पास टिकट थे पर मेरे पास नहीं क्यों की मैं जानेवाली नहीं थी और एकदम से प्लान बन गया। वेटिंग टिकट ले ली और सोची की एडजस्ट कर के चली जाउंगी।Antarvasna

साइड वाला सीट था और एक लोअर तो माँ लोअर में चली गई और मैं और मामा जी दोनों साइड वाले साइट पर दोनों पैर फैला कर बैठ गए। रात का खाना आया और तीनो खाना खा लिए माँ सो गई क्यों की उनकी तबियत ठीक नहीं थी इसलिए मैं उनको तंग नहीं कर रही थी और एक ही सीट पर मामा और भांजी एडजस्ट करने वाले थे।Antarvasna

पर धीरे धीरे उनके पैर मेरी जांघ से सटने लगा, पहले तो थोड़ा अलग लग रहा था फिर मैं नार्मल हो गई और लेट गई अब उनके पैर की ऊँगली मेरे चूत के पास सटने लगा मैं भी हिल हिल कर मजे लेने लगी और वो फिर पुश कर कर के। दोनों मजे ले दे रहे थे। ट्रैन सरपट भागी जा रही थी अब दोनों कांबले के निचे मैं सो रही थी वो बैठे थे पर्दा लगा हुआ था साइड से मैंने पिन लगा दी थी ताकि कोई देखे नहीं।Antarvasna

अब बात और आगे बढ़ गई वो मेरे पैरों को सहलाने लगे। मैं भी ढीली हो गई और आराम से लेट गई सीधी हो कर अब वो मेरे दोनों पैरों के बिच में मेरे चूत में आराम से अपने पैर लगा कर महसूस करने लगे मेरे बर्दाश्त के बाहर हो रही थी बात मेरी चूचियां मचल रही थी मैं अपने चूची को दबाने लगी। मैं सोची जो होगा देखा जाएगा और मैं उनको ऑफर कर दी। ले लो आराम से।Antarvasna

ले लो आराम से वो सुनते हि लेट गए मेरे साथ और मेरे होठ को चूमने लगी मेरी चूचियों को दबाने लगे। मैं अपना गांड उनके तरफ कर के सो गई। वो मेरे पेंट को निचे कर दिए मेरी पेंटी भी निचे कर दी। और अपना लंड भी निकाल लिए और मेरी जवान चौड़ी गांड में सटाने लगे. मैं रगड़ रही थी वो भी जोश में आ गए थे। वो लौड़े में थूक लगा लिए और पीछे से ही मेरे चुत में डालने लगे। पर सही से नहीं जा रहा था मैं अपने पेण्ट को उतार दी और जांघिया एक ही पैर में रहने दी। अब मैं निचे से खुली ही नंगी थी। वैसे ही लेटी रही और एक पेअर को ऊपर करके उनके ऊपर रख दी अब मेरी चूत आराम से लंड डालने के लिए तैयार थी।

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मामा जी का मोटा लंड फनफना रहा था वो मेरे चूत के बीचो बिच लौड़ा लगाए और धक्के देने लगे। मुझे दर्द भी हो रहा था पर वो दर्द में मजे भी भी इसके पहले भी मैं एक दो बार चुद चुकी थी तो सील टूटी हुई थी। अब मामा जी का पूरा लौड़ा मेरे चूत में समा गया था ट्रैन सरपट भाग रही थी शायद लखनऊ क्रॉस हो रही थी और मैं चुद रही थी जोर जोर से वो लंड को पेल रहे थे और मैं आह आह आह कर के मजे ले रही थी।Antarvasna


दोस्तों वो मेरी चूचियों को कस के दबा रहे थे और फिर मेरे गर्दन को गाल को होठ को चूस रहे थे। डर लग रहा था कही दांत का निशान ना पड़ जाये मेरे जिस्म पर। गोल गांड और उभरे हुए चूतड़ झप झप की आवाज कर रही थी ज्यों ज्यों तेज गति से चुदाई होती चाप चाप की आवाज आती और मेरे मुँह आह आह की आवाज निकल जाती। दोस्तों तभी मेरी माँ जग गई शायद मेरी आह आह की आवाज उनको सुनाई दे दी थी। मुझे तो लगा वो समझ गई है मैंने मामा जी को बोला की माँ जाग गई है तो वो बोले कोई बात नहीं प्लान तो हम भाई बहन का था चुदाई करने का आज ट्रैन में पर तू आ गई और ये हो रहा है।Antarvasna

तो मैं मामा जी से पूछी की क्या आप और माँ दोनों सेक्स करते हैं। तो वो बोले हां हम दोनों करीब दस साल से एक दूसरे के जिस्म को ठंढा करते आ रहा हैं जब जिस्म गरम हो जाता है।Antarvasna

Antarvasna Sex Stories -  Antarvasna मे तीन - तीन चूत की चुदाई

मैं बोली बहनचोद अब तो भांजी पर भी हाथ फेर लिए। और हम दोनों हसने लगे। दोस्तों अभी तो नहीं पता फिर कब चुदाई होगी। मैं तो घर आकर ये कहानी नॉनवेज स्टोरी डॉट कॉम पर लिख रही हूँ। फिर हम दोनों का रिस्ता कैसा रहता है बाद में बताउंगी पर हां ट्रैन में मेरी चुदाई बहुत ही हॉट तरीके से हुई थी और यादगार है।

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