Tuesday, 10 December 2019

अन्जिनियर चुदक्कड ही होते हैं भाई

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मैं बी.टेक. 3 का छात्र हूँ, मेरी उम्र 21 साल है और पढने में काफी अच्छा हूँ. मेरी ब्रांच कंप्यूटर साइंस है और मेरे क्लास में करीब 15 लड़कियां है. हमेशा से ही मैं क्लास में आगे बैठा था और पुरे मन से पढ़ाई करने की कोशिश करता था. पिछले 3 साल में शायद ही मैं दारू पी होगी या किसी लड़की से अच्छे से बात की होगी, पर मैं हमेशा छुप छुप के पोर्न मूविज और स्टोरीज पढ़ा करता था और किसी भी लड़की या आंटी को देखकर मन ही मन ख्याल बनाया करता था. यह कहानी मेरे क्लास की देसी लड़की अनीता की चुदाई की है, जिसे मैंने क्लास के अंदर ही अपना लंड दे दिया था….!
एक दिन सुबह ८ बजे की क्लास थी और मैं क्लास में लेट हो गया था उस दिन मुझे पीछे बैठना पड़ा था. एक्जाम आने वाले थे इस लिए मैं रात भर पढ़ रहा था. मुझे काफी नींद आ रही थी और मैं क्लास में ध्यान नहीं दे पा रहा था. हमारे क्लास की डेस्क काफी बड़ी हैं और एक में करीब ३ लोग बैठ जाते हैं. मैं सबसे पीछे वाली डेस्क पे अकेले बैठा सर नीचे कर के सोने की कोशिश कर रहा था. अचानक मेरी नज़र मेरे बाजु वाली डेस्क पे पड़ी, उसमे विकास और अनीता बैठे हुए थे, विकास काफी पढ़ने वाला लड़का था और अनीता हमारे क्लास की सबसे सुन्दर देसी लड़की थी, उसका शरीर काफी गठीला था और बूब्स बहुत सुडोल. जब वो शर्ट पहनती थी तो शर्ट के बटन भी ठीक से नहीं बंद हो पाते थे. सारे लड़के इस देसी लड़की की एक नज़र पाने के लिए भी पागल रहते थे. पहले तो मुझे कुछ समझ नहीं आया मैंने ध्यान स देखा तो देखा की  देसी लड़की तरह तरह के एक्सप्रेशन दे रही थी. उसी समय विकास का पेन नीचे गिर गया और वो उसे उठाने लगा, अभी भी मुझे कुछ ठीक से समझ नहीं आ रहा था.
इस देसी लड़की के एक्सप्रेशन और भी भारी हुए जा रहे थे और विकास काफी देर से ही पेन उठा रहा था. मुझसे रहा नहीं गया और मैंने भी नीचे झुक के देखा, वो देखते ही मैं सन्न रह गया. देसी लड़की की स्कर्ट के अन्दर विकास का सर था और यह हॉट लड़की उसके बाल सहला रही थी. थोरी देर में ही लेक्चर ख़तम हो गया और वो दोनों उठ के साथ में ही कहीं चले गये. मेरी पूरी नींद उड़ चुकी थी बस अनीता के वो दर्द भरे एक्सप्रेशन ही मेरे दिमाग में चल रहे थे. मैं तुरंत रूम गया और उसे सोच कर मुठ मारने लगा.
अगले दिन से मैं रोज़ पीछे ही बैठने लगा और पूरी हरकतों पे नज़र रखने लगा. अगले दिन कंप्यूटर ग्राफ़िक्स की क्लास थी, उसका टीचर काफी सीधा है और किसी को कुछ कहता नहीं है, क्लास में भी काफी कम लोग थे मैं उसी डेस्क में बिठा था और वो दोनों भी बाजु वाली पे, थोड़ी देर में ही उनकी हरकतें शुरू हो गयी थी, पहले तो विकास ने इस देसी लड़की की स्कर्ट के अन्दर हाथ डाल के उसकी जांघे सहलाना शुरू कर दिया था, धीरे धीरे उसका हाथ और अन्दर जाता गया, देसी लड़की की हवस भी बढ़ती जा रही थी. फिर देखते ही देखते विकास ने बैठे बैठे ही अनीता की पेंटी नीचे उतार दी थी, अब वो स्कर्ट के अन्दर पूरी नंगी थी और विकास कभी हाथ डालता तो कभी अपना मुह ही स्कर्ट के अन्दर डाल देता. अनीता भी मचल मचल के पागल हो रही थी और उसने विकास की  पेंट के अन्दर से उसका लंड निकला और पागलो की तरह चूसने लगी. मेरी तो हालत ख़राब हो रही थी, पेंट के अन्दर एक तो मेरा लंड समां नहीं रहा था और दूसरी तरफ वो बिना टीचर की परवाह किये क्लास में ही पुरे मज़े ले रहे थे. मैं बार बार नीचे झुक के देख रहा था अनीता की चूत तो नहीं देख पाया पर उसकी गांड पूरी नज़र आ रही थी मुझे, थोरी देर तक वो एक दुसरे के साथ खेलते रहे और फिर शायद विकास जड़ गया और वो दोनों रुक गए थे, शायद अनीता अभी पूरी तरह से सेटिसफाय नहीं हुई थी और उसका मूड थोड़ा ऑफ हो गया था. क्लास खत्म हो गया था पर पता नहीं क्यूँ अचानक टीचर ने विकास को अपने पास बुलाया और अपने साथ ले गया.
देसी लड़की वहीं क्लास में उसका इंतज़ार करती रही क्लास पूरा खाली हो चूका था और यह देसी लड़की अकेली बैठी थी अन्दर थोरी देर में अनीता किनारे वाली डेस्क में जा के बैठ गयी और अपनी पेंटी उतार दी. मैं छुप के साइड वाले दरवाज़े से देख रहा था, फिर उसने अपनी स्कर्ट उठाई और अपनी चूत के अन्दर ऊँगली करने लग गयी. इस समय मुझे उसकी चूत साफ़ साफ़ दिखाई दे रही थी, उसमे घने बाल थे और उसके गुलाबी मुह से पानी रिस रहा था, करीब 2 मिनट तक देसी लड़की अपनी ऊँगली अन्दर बाहर करती रही. इतना देख कर मुझसे कण्ट्रोल नहीं हुआ और मैंने क्लास के अन्दर घुस के दरवाजा बंद कर दिया. वो एकदम से घबरा सी गयी थी और इससे पहले की वो कुछ कर पति मैंने अपनी पेंट से अपना लंड बाहर कर दिया. वो शायद थोड़ा डर गयी थी और इसलिए अपनी पेंटी पहन के क्लास के बाहर जाने लगी, लेकिन जैसे ही वो बाहर जाने लगी मैंने झटके से उसका हाथ खिचा और अपने तने हुए लंड पे रख दिया. फिर क्या वैसा ही हुआ जैसा मैंने सोचा था उसने बिना रेसिस्ट किये ही तुरंत मेरा मोटा काला लंड अपने हाथों में लिया और हिलाने लगी.
धीरे धीरे उसने खुदही मेरा पेंट खोल दिया और जॉकी नीचे खिसका के लंड और टट्टे पागलों की तरह चाटने लगी. ये मेरा पहला टाइम था इस लिए मुझसे भी कण्ट्रोल नहीं हो रहा था. मैं तुरंत उठा और क्लास के दोनों दरवाजे चेक किये, फिर मैंने अपनी शर्ट भी खोल दी और अनीता के सामने पूरा नंगा हो गया था. अब तो अनीता चुदने के लिए बेताब थी.
मैंने धीरे धीरे उसके कपड़े उतारने शुरू किये सबसे पहले उसकी टाइट शर्ट खोली, शर्ट खोलते ही उसके बड़े बड़े स्तन आज़ाद हो गये, काले रंग की टाइट ब्रा पहने थी वो, फिर मैं उसकी पीठ को चूमने लगा और दातों से ही उसकी ब्रा के हुक खोल दिए.अब उसके स्तन आज़ाद हो चुके थे और मैं उन्हे पीछे की तरफ से दबाने लगा. मेरा लंड बार बार अनीता की गांड को छु रहा और इस लिए उसका इकसाईटमेंट भी बढ़ता जा रहा था.
मैं भी पागल हो रहा था और कभी उसके स्तन दबाता और कभी निप्पल को धीरे से काट लेता. इस दर्द में उसे भी बहुत मज़ा अ रहा था. फिर अनीता से ज्यादा रहा नहीं गया और उसने खुद ही मेरा सर पकड़ के अपनी स्कर्ट के अन्दर कर लिया. मैं समझ गया था अब उसे भयानक चुदास सवार है, पर मैं भी इतनी जल्दी कहाँ मानने वाला था. मैंने देसी लड़की को डेस्क पे बैठा दिया और उसके पैर चीर दिए. फिर पेंटी के ऊपर से ही उसकी चूत चाटने लगा, वो बेचारी मचल ही पड़ी थी और बार बार छोड़ने को कह रही थी.
फिर मैंने उसकी पेंटी निकाल दी और स्कर्ट भी खोल दी. अब मैं और देसी लड़की उस क्लास में पूरे नंगे थे. मैं कभी उसकी चूत चाट रहा था तो कभी उसकी गांड के छेद में ऊँगली कर रहा था. उसने भी मेरा लंड भरपूर चाटा. अब हम दोनों से रहा नहीं जा रहा था मैंने उसे डेस्क पे लिटाया और उसके पैर पूरी तरह से खोल दिए, फिर उसकी घनी चूत पे अपना लंड  रगडने लगा. और एक दो झटके दे कर लंड उसकी चूत में डाल दिया दर्द तो हम दोनों को हो रहा था पर मज़ा भी खूब आ रहा था.
थोरी देर में देसी लड़की झड गयी पर मेरे लंड में अभी भी कुछ गर्मी बाकी थी. मेरे मन में अभी भी उसकी सुन्दर गांड घूम रही थी. मैंने अनीता को खड़ा किया और उसे डेस्क के सहारे झुका दिया. उसके गांड के छेद को थोरी देर चाटा और फिर उसपे लंड रगडने लगा. अनीता ने पहले ऐसा कभी नहीं किया था इस लिए वो मना करने लगी लेकिन अब मुझसे रुका नहीं जा रहा था. मैंने कस के उसे पीछे से पकड़ा और चूची दबाने लगा वो ज्यादा हिलडुल नहीं पा रही थी और इसी बीच धीरे से उसके गांड के छेद को अपने लंड से भर दिया पहले तो उसे बहुत दर्द हुआ पर फिर मज़ा आने लगा वो भी झटके मारने लगी, अब मुझे और भी मज़ा आने लगा था और अपना मोटा लंड पूरा का पूरा उसकी गांड में डाल दिया था, 2 मिनट तक लगातार खूब झटके मारे और फिर मेरा भी मुठ निकलने वाला था, मैंने तुरंत लंड निकला और उसके मुह में दे दिया वो उसे भरपूर चाटने लगी और पूरा का पूरा मुठ पी गयी इस चुदाई के बाद हम दोनों बहुत संतृप्त थे और खुशी से कपडे पहन के निकल गए. इसके बाद मेरी अनीता से काफी बात होने लगी और अब क्लास में वो विकास को छोड़ मेरे साथ पीछे वाली डेस्क में बैठने लगी. वहीँ क्लास में बैठे बैठे हम दोनों एक दुसरे के गुप्तांगों से खेलते रहते और जब भी मौका मिलता, कभी क्लास के बाद तो कभी डिपार्टमेंट के पीछे जम कर चुदाई करते. इस देसी लड़की ने मुझे चुदाई के बहुत नए नए दाव भी सिखाये है, जो मैं इस देसी लड़की की चुदाई के वक्त आजमाता रहेता हूँ, क्या आप भी कोई देसी लड़की की चुदाई कर चुके है…?

सहेली के भाई ने चोदा मुझे

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हाई दोस्तों मेरा नाम साजदा है और मैं अलाहबाद की रहने वाली हूँ. यह बात तब की है जब मैं 21 साल की थी और कोलेज में पढाई करती थी. कोलेज में उन्नति और निर्मला मेरी खास सहेलियां थी. उन्नति के डैड आर्मी में है और निर्मला के मम्मी डेडी दोनों ही एक स्कुल में टीचर थे. उन्नति का भाई अर्जुन हमारे साथ ही कोलेज में था लेकिन वह हम से एक साल छोटा था. अर्जुन मुझे पहले से ही अच्छा लगता था और वह मुझे अक्सर घूरता रहेता था. उन्नति और निर्मला दोनों को यह बात पता नहीं थी. मेरे मन में भी इस देसी लड़के के साथ चुदने की इच्छा जागी थी पर दोस्त का दिल टूटे यह भी मुझे पसंद नहीं था. मैं अक्सर अर्जुन के बारे से सोच कर अपनी चूत में ऊँगली लिया करती थी. मैं बस उसका लंड एक बार अपनी चूत के अंदर लेना चाहती थी. मेरा यह मौका आखिरकार सफल हुआ, उस दिन मैं उन्नति के घर गई थी……!
उन्नति से एक सब्जेक्ट के नोट्स लेने के लिए एक दोपहर को मैं उसके घर गई थी, उसका मोबाइल बंध था इसलिए मेरी उससे बात नहीं हो पाई थी. मैं घर जा के उसका डोरबेल बजाने लगी. डोर अर्जुन ने ही खोला और वह केवल बनियान और एक कोटन की लेंघी पहने हुआ था. शायद गर्मी से बचने के लिए उसने कम कपडे पहने हुए थे. मैंने थोडा शरमाते हुए पूछा, उन्नति है….? अर्जुन ने कहा, नहीं वो तो मोम डेड के साथ अंकल के घर गई है. अंकल की तबियत ख़राब है. उसने मुझे कहा, अंदर आइये. मेरा मन भी मुझे अंदर जाने को कहने लगा. मैं अंदर गई और सोफे पर बैठी. तभी मेरी नजर टीवी के पास पड़े डीवीडी प्लेयर के उपर पड़ी. उसके उपर एक 2X मूवी का डीवीडी मेरी चूत को उकसाने के लिए काफी था. मैं मनोमन सोच रही थी जो आज अर्जुन हाथ पकड़ा दे तो मैं उसका लंड पूरा चूस लूँ. अर्जुन मेरे लिए पानी ले आया और हम दोनों बातें करने लगे.
मैने थोड़ी बातें इधर उधर कर के अर्जुन से पूछा के गर्लफ्रेंड बनी के नहीं. उसने हँसते हुए कहा बनानी तो हैं पर डर लगता हैं दीदी को पता चला तो घर में पिट्वाएगी. मैं उसे कहा दीदी का इतना टेंशन मत लो अर्जुन, जवानी में सब चलता है. थोडा क्रेज़िनेस तो चाहिए ना. वैसे कोई तो अच्छी लगती होंगी तुम्हे. मैंने उसकी आँखों में अपनी आँखे गडाई थी. अर्जुन जैसे की मेरे नजरो से डर रहा था और उसने मुझ से आँखे चुराते हुए कहाँ, नहीं रहने दो अभी फिर कभी बताऊंगा. उसका यह शरमाना मेरी चूत को और भी बेताब कर रहा था.मैं खड़ी हुई और उसके एकदम करीब बैठ गई, उसकी जांघे और मेरी जांघे टच हो रही थी. अर्जुन मेरी तरफ देख के बोला रहने दो साजदा जी मेरा कुछ मेल नाही खाने वाला…मैंने उसकी आँख से आँख मिलाई और उसने सीधे ही मेरी होंठो पर अपने हाथ रखे और बोला…मुझे आप पसंद हो साजदा जी….!!!
वैसे मैं तू उसे उसका कर अपनी चूत तृप्त करवाना चाहती थी लेकिन मैंने मनोमन सोचा साजदा यह तो तुझे ही चाहता है यह चूत चाटेगा भी और चुसेगा भी….! मैंने ख़ाली ख़ाली शर्माने की एक्टिंग की और वो बोला, देखा मैंने कहा था ना की मेरा मेल नहीं खाएगा. मैंने अब उसकी तरफ देखा और कहा, अर्जुन ऐसी बात नहीं है…मुझे भी तुम पहले से ही अच्छे लगते हों. इससे पहले की वोह भावनाओं मैं बह जाए में उससे लपट गई और उसे अपने चुंचो से छाती का स्पर्श करवा दिया. वोह मुझे कस के गले लगाने लगा और उसका तगड़ा लौड़ा मेरी चूत के बिलकुल उपर था.
मैंने अर्जुन के सीने पे हाथ फेरा, उसका दिल 100 की स्पीड से धडक रहा था और वह मेरे प्रत्येक स्पर्श से लम्बी साँसे लेता था. मैंने हाथ निचे सरकाया और उसकी लेंघी में हाथ डाल के लंड को दबा दिया. अर्जुन बोला….ओह साजदा,…आई लव यु. मैंने लंड को दबाये रखा और कहा…आई लव यु टू अर्जुन. जल्दी कपडे उतारो मुझे तुम्हारा लंड देखना है. अर्जुन दंग रह गया क्यूंकि मैं पहली बार लंड बोली थी उसके सामने. उसने अपने कपडे उतारे और मेरे स्तन को दबाने लगा. मैंने भी अपना फ़्रोक और इजार खोल दी. उसने मेरे ब्रा पेंटी को हटाया और मेरी जवान अंग देख उसका लौड़ा क़ुतुब मीनार के जैसा खड़ा हो गया. मैंने उसके लौड़े को थोडा हिलाया और उसके मुहं से आह आह निकलने लगा. मैंने कुर्सी में बैठ के अपनी टाँगे फैला दी और अर्जुन से कहा…अर्जुन कामरस चखोंगे. वह मेरी बात समझ गया और कुर्सी के पास निचे बैठ गया, मैंने दोनों टाँगे उसके कंधो पर रख दी. अर्जुन पहले मेरे चूत के होंठो को स्पर्श करने लगा और फिर उसने धीमे से चूत के अंदर अपनी जीभ लगाईं. मेरे पुरे शरीर से जैसे की करंट दौड़ गया. उसने तुरंत जीभ अंदर घुसाई और मेरे चूत के रस को पिने लगा. वह अपनी जीभ से चूतके होंठो को चूस रहा था और फिर बिच बिच में होंठो को चाट रहा था. मेरी उत्तेजना भी उसकी तरह ही चरम सीमा पर थी.
वोह रुका और उसने अपना मुहं चूत से निकाला. मैंने खड़े होते हुए उसे कुर्सी में बेठने के लिए इशारा किया. वह जैसे कुर्सी में बैठा मैने उसका लंड हाथ में पकड़ा और उसे हिलाने लगी. उसने एंठना चालू किया और मैंने उसके एंठन को बढ़ावा देते हुए उसका लौड़ा अपने मुहं में ले लिया. अर्जुन लंड मेरे मुहं में धकेलने लगा और मैं अपनी चूत के उपर अपना हाथ रख के सहलाने लगी. मुझे भी चूत के अंदर लंड ले लेने की तलब लगी थी. अर्जुन धक्के दे दे मेरा मुहं चोद रहा था. मुझे अपने स्तन के बिच उसका लंड लेने की फेंटसी हुई और मैंने उसे यह कहा. अर्जुन ने मुझे निचे लिटाया और वह मेरे स्तन के बिच लंड दे के मुझे टिट-फक करने लगा, मैं उसके लौड़े पर थूंक थूंक के उसे गिला रख रही थी. मेरे हाथ मेरे चूत के ऊपर चल रहे थे. मुझे अब लंड से चुदाई की एक असीम उछाल सी आ गई थी.
अर्जुन ने मेरे पांव खोले और अपना लंड का सुपाड़ा उसके उपर घिसने लगा. मुझे बहुत ही मजा आ रहा था और मैं उसके तरफ प्यार से देख रही थी. मेरी चूत से प्रवाही निकलने लगे और मैंने उसका लंड पकड के अंदर की तरफ मोड़ा. उसका लंड मुझे गर्म गर्म लग रहा था, अर्जुन ने सीधा लंड अंदर किया और मैं इस उत्तेजना को बर्दास्त नहीं कर पाई मैंने उसे गले लगा लिया. अर्जुन ने लंड अब घचघच अंदर डालना चालू किया. उसके लंड से मुझे अंदर एक अजीब मजा आ रहा था और यह मजा शब्दों में बयान नहीं हो सकता. अर्जुन लंड डाल डाल के बहार निकाल रहा था और चूत के अंदर मेरी उत्तेजना बढती ही जा रही थी. मैंने अपने दोनों हाथ अर्जुन के गले में डाले हुए थे और वह जैम के मुझे चोदता जा रहा था.
अर्जुन का लंड थकने का नाम ही नहीं ले रहा था. मुझे तो ऐसा था की वह थोड़ी चुदाई करने के बाद चूत में अपना रस निकाल देगा लेकिन वह तो और भी जम के चुदाई करने लगा. उसने अपना लौड़ा अब मेरी चूतसे निकाला और उसने मुझे कुतिया जैसा बना दिया. मैं जैसे ही उलटी हो के डौगी स्टाइल में आई. उसने मेरी चूतके अंदर पीछे से अपना लौड़ा घुसेड दिया. वोह मेरे गांड को दोनों साइड से पकड के ठोकने लगा. मेरे चूत से अब झाग तक निकलने लगा था लेकिन वह अभी भी वहीं झडप से मेरी ठुकाई कर रहा था. अर्जुन ने मुझे कंधे से पकड़ा हुआ था और दोनों जगह उसका स्पर्श मुझे उत्तेजना देने के लिए काफी था. मैं अब थक सी गई थी. अर्जुन के झटके बढ़ते ही गए और तभी मुझे अंदर लगा की कुछ पानी चूतके अंदर छुटा….और तभी उसके साथ थोडा ज्यादा गर्म पानी निकला – पहला पानी मेरी चूतसे निकला था और गर्म पानी अर्जुन का वीर्य था जो चूत के होंठो से भी बहार टपक रहा था. हम दोनों मस्त शांत हो गए और एक दुसरे की बाहों में ही सो गए…..!!!
अर्जुन और मेरी चुदाई इसके बाद रुकी नहीं हैं…अर्जुन और मेरी चुदाई चलती रहती है..उसे मेरी चूत और मुझे उसका लंड भा सा गया है. उसने कितनी बार मेरी गांड भी मारी है जिसकी कहानी फिर कभी फुर्सद से सुनाउंगी.

Saturday, 7 December 2019

बनिये ने गोडाउन में मेरी चुदाई की

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हेल्लो दोस्तों मैं नवी मुंबई से पलक पटेल…मेरी उम्र 21 साल की हैं और मेरी फिगर 34-30-34 हैं. मैं आज आपको मेरी पहली चुदाई की कहानी बताने जा रहीं हूँ, यह चुदाई हमारे घर के सामने किराना की दुकान वाले बाबूलाल ने की थी. मेरे पिताजी एक ऑफिस में क्लर्क हैं और मुश्किल से हमारा गुजारा होता है. उस दिन मैं बनिए के पास तेल लेने गई थी और उसने मुझे लंड दे दिया. आइये आपको यह चुदाई की कहानी मैं विस्तार से बताऊँ.

शर्दी के दिन थे और करीब शाम के 7 बजे थे लेकिन अँधेरा छा चूका था. मेरी माँ ने मुझे कहाँ पलक जा तेल ले आ बाबु की दुकान से उसे कहना पैसे तेरे पिताजी दे देंगे. मैं उदास मन से ही बनिए के वहां गई क्यूंकि वह एक नंबर का हरामी थी. इस से पहले भी उसने एक दो लड़की को छेड़ा था और पैसे दे के केस दबाये थे. वह लड़की को पूरा उपर से निचे देखता था और उसकी नजर वासना से भरी होती थी. उसका चुदाई का कीड़ा बहुत बलवान था और उसे हमेशा चोदने की इच्छा लगी रहती थी. मैंने जैसे ही दुकान पर पहुँच कर तेल माँगा वह मुझे अपनी वही कुत्तेवाली नजर से देखने लगा, तब दुकान पर एक और महिला भी खड़ी थी. बाबूलाल ने उसको सामान दिया और वह चली गई. बाबूलाल मेरी तरफ देख के बोला के तेल पीछे गोडाउन में हें. एक काम करता हूँ दुकान बंध कर के तुझे वहीँ से तेल निकाल देता हूँ. मुझे थोड़ी हिचकिचाहट तो तभी हुई क्यूंकि मुझे पता था की बनिया बाबूलाल एक नंबर का चुदक्कड है और वो चुदाई का एक भी मौका हाथ से जाने नही देता. मैं डरते डरते उसके गोडाउन में गयी. उसका गोडाउन दुकान के पीछे वाले हिस्से में था.

उसने अंदर जा के लाईट जलाई, लेकिन इस बनिए की लाईट भी उसके जैसी ही कंजूस थी, कमरे में अभी भी जैसे के अँधेरा था. मैंने पतीली हाथ में पकड़ी थी. बनिए ने तेल का पिप हटाया और बोला, “पलक तू मुझे आज चोदने दे दे. मैंने तुझे 500 रूपये दूंगा….!”

मैं डर के पीछे हटने ही वाली थी के उसने मेरा हाथ पकड लिया और बोला, “घबरा मत…500 रूपये भी दूंगा और तुझे हर महीने खर्चा पानी देता रहूँगा….देख ले एक बार ले ले फिर पस्ताएगी.”

मैंने अभी भी डर रही थी..वैसे 500 रूपये मुझे आअज तक एक साथ कभी नहीं मिले थे..पुरे महीने के खर्च के तौर पर भी. मेरे मन में सवाल आया, बनिया 500 दे रहा है और वोह भी एक बार चोदने के…लूँ या ना लूँ. मैं यही कसमकस में थी और बाबूलाल बनिए ने 100-100 के पांच नोट निकाले और मेरे सामने रख दिए. मुझे 100 के नोट की खुसबू सूंघे काफी अरसा हो गया था. मैंने नोट हाथ में लिए और कहा, “जल्दी करना. मेरी माँ राह देख रही है घर पे.”

बाबूलाल, “अरे रानी, घबराती क्यूँ है. मैंने तेरी माँ को भी कितनी बार यही चोदा है. अगर वो ज्यादा कुछ कहे तो बोल देना गोडाउन गए थे तेल निकालने. वैसे मैं उसे यहाँ घेउं, बाजरा, चावल, तेल. सक्कर सब निकालने के लिए ला चूका हूँ”…..यह सुनके मुझे अजीब तो लगा लेकिन फिर मेरे दिल में ख्याल आया बाबूलाल की बात सच तो लगती है क्यूंकि मेरी माँ कभी कभी तो उसकी दुकान पर आती और 20-25 तक वापस नहीं आती थी. बाबूलाल ने अपनी धोती उतारी और सफ़ेद लंगोट में उसका तना हुआ लंड चुदाई के लिए पोजीशन लिए ही खड़ा था. मैंने आज तक कभी लंड देखा भी नहीं था. उसने जैसे ही लंगोट हटाई मेरे दिल में एक सनसनी उठी. उसका लंड बालो से घिरा हुआ था. उसके गोते बड़े बड़े और गोल थे. उसने लंड को हाथ में लिया और हिलाने लगा. उसने मुझे वहीँ एक बोरी पर बिठाया और बोला, “यह ले चख इस सेक्स के क़ुतुब मीनार को….!”

मुझे अजीब तो लगा लेकिन मैंने जैसे ही मुहं मेंलंड को लिया मेरे शरीर में एक अलग ही आनंद उठा और मैं लंड को अंदर तक चूसने लगी. बाबूलाल ने मेरा माथा पकड़ा और उसने लंड को मुहं में अंदर बहार डालना चालू कर दिया. बाबूलाल का लौड़ा मेरे मुहं को चोद रहा था और मुझे भी चूत के अंदर गुदगुदी होने लगी थी. मैंने कुछ 2 मिनिट उसका लौड़ा चूसा था की वह बोला, “चल रानी अपने कपडे उतार दे. तुझे तेल दे दूँ.” मैंने अपनी चोली और घाघरा उतारा, मैंने आज ब्रा नहीं पहनी थी इसलिए चोली खोलते ही बनिए को मेरे बड़े बड़े स्तन दिखने लगे. वह भूखी लौमडी की तरह स्तन पर टुटा और उसने बारी बारी दोनों स्तन चूस डाले. उसका लंड मेरी जांघो को अड़ रहा था और मुझे चूत में चुदाई की गुदगुदी हो रही थी. उसने स्तन को चूस चूस के उनमे दर्द सा अहेसास करवाया, लेकिन यह दर्द बहुत मीठा था और मैं खुद चाहती थी के बाबूलाल मेरे चुंचे और भी जोर से चुसे. बाबूलाल अब रुका और उसने मुझे बोरियों के उपर ही सुला दिया.

बाबूलाल ने अपना लंड मेरी चूत के उपर घिसा और उसके लंड की गर्मी मुझे बेताब कर रही थी. मैंने उसके सामने देखा और उसके चहेरे पर मेरी जवान चूत के लिए टपकती हुई लाळ साफ़ नजर आ रही थी. बाबूलाल ने एक धीमा झटका दिया और लंड मेरी चूत में दिया. उसका आधे से ज्यादा लंड मेरी चूत में था…..मैं चीख पड़ी और मेरी चूत से खून निकल पड़ा….”अरे बेन्चोद, तू तो वर्जिन है मेरी रानी..पहले बताती ना…..!!!”

मैं दर्द से मरी जा रही थी लेकिन बाबूलाल ने इसकी कोई परवाह नहीं की और लंड पूरा चूत में पेल दिया. खून तुरंत बंध हुआ और मुझे चुदाई का मजा आने लगा. बाबूलाल चूत के अंदर लंड को धीमे धीमे पेल रहा था. यह बनिया तह होंशियार, उसे पता था की कब क्या स्पीड से लंड देना है. पहले वह धीमे से मेरी चुदाई कर रहा था लेकिन जैसे उसने देखा की मैं चुदाई से एडजस्ट हो चुकी हूँ उसने झटके और तीव्र कर दिए..उसका लंड अंदर मेरी चूत की दीवारों को जोर जोर से ठोक रहा था और मुझे असीम सुख मिल रहा था. मुझ से अब चुदाई का सुख जैसे की झेला नहीं जा रहा था. मैंने बूढ़े बाबूलाल को नाख़ून मारे और मैं खुद अपनी गांड हिला के उससे मजे से चुदवाने लगी. बाबूलाल मेरे स्तन दबाने लगा और उसने चोदने की गति और भी बढ़ा दी. कुछ 5 मिनिट और चोदने के बाद बाबूलाल का लंड वीर्य छोड़ने लगा और उसने मेरी चूत को पूरा भिगो दिया, उसकी साँसे फुल गयी थी और वह थक सा गया था. उसने मेरी तरफ प्यार से देखा और बोला…..”पलक रानी, अब तो तू ही मेरे गोडाउन की मालकिन बनेगी….!!!”

जब ममैं घर पहुंची तो मेरी माँ मेरी राह देख रही थी, उसने मुझे पूछा “इतनी देर क्यों हुई पलक”….जब मैंने उसे कहाँ, “तेल ख़तम हो गया था दुकान में तो पीछे गोडाउन से निकालने गए थे”…..तो उसकी शकल के बारा बजे हुए थे….उसे भी पता चल गया की उसकी बेटी चुदाई करवाके ही आई है…….!

Wednesday, 4 December 2019

प्यासी जवानी

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मैं एक मस्त मौला लड़का हूँ, मैं बिलासपुर छत्तीसगढ़ का रहने वाला हूँ। मुझे खूबसूरत लड़कियाँ बेहद भाती हैं, उन्हें देखकर इस दुनिया के सारे गम दूर हो जाते हैं। मैं एक प्राइवेट स्कूल में टीचर था। हमारे स्कूल में जो कि शहर का नामी स्कूल था अच्छे घरों के बच्चे पढ़ने आते थे। हमारे स्टाफ में भी अच्छे खानदान की सुन्दर बहुएँ और बेटियाँ भी पढ़ाने आती थी।
मैं एक मध्यम वर्ग का लड़का था, मुझे घर चलने और अपनी पढ़ाई जारी रखने के लिए टीचर बनना पड़ा था। खैर मैं पढ़ाने में अच्छा था और प्रिंसिपल मुझसे खुश था, मुझे स्कूल में थोड़ी आजादी भी मिल गई थी, मैं अपने खाली समय में स्कूल की बाउंडरी के बाहर एक दुकान में चला जाता था।
एक दिन मैं दुकान गया तो दुकान में कोई नहीं था। मैंने मालिक को आवाज़ लगाई तो परदे के पीछे कुछ हड़बड़ाने जैसी आवाजें आई और थोड़ी ही देर में दुकानदार लुंगी पहने आया। उसके चेहरे से मुझे पता चल गया कि मैं कबाब में हड्डी बन चुका था। खैर मैं थोड़ी देर बात करने के बाद वापस आ गया और स्कूल के दरवाजे के सामने वाले कमरे में छुप गया। कुछ देर में उसी दुकान से हमारे स्कूल की आया सुनीता चेहरा पोंछते हुए निकली।
मैं समझ गया कि माजरा क्या है। मैंने उससे खुलने के लिए सामने आकर पूछा- कहाँ गई थी?
तो उसने सर झुका कर जवाब दिया- कुछ सामान लाना था।
मैंने पूछा- कहाँ है सामान?
तो वो हड़बड़ा कर अन्दर भाग गई।
उस दिन के बाद मैं उसे देख के मुस्कुरा देता और वो मुझे देख कर भाग जाती। मैं उसके बारे में सोच कर अपने लंड को सहलाता था। उसकी उम्र 25 के आसपास थी और उसके दोनों अनार उसके ब्लाऊज में से तने हुए क़यामत दीखते थे। उसके होंठों के ठीक ऊपर एक तिल था जो उसे और मादक बना देता था पर उस भोसड़ी वाले दुकानदार को यह चिड़िया कैसे मिली, यह सोच कर मेरा दिमाग गर्म हो जाता था। खैर उस हसीना के ब्लाऊज में झांकते हुए मेरे दिन कट रहे थे कि इतने में 15 अगस्त आ गया, स्कूल में रंगारंग कार्यक्रम था, स्कूल की बिल्डिंग के बाहर मैदान में पंडाल और स्टेज लगा था, स्कूल की बिल्डिंग सूनी थी, मैंने राऊंड लगाने की सोची कि शायद हसीना दिख जाये।
मैंने चुपचाप अपने कदम लड़कियों वाले बाथरूम की तरफ बढ़ाये, बाथरूम में से हमारे स्कूल की एक मैडम की आवाज आई। मैंने दीवार की आड़ लेकर झाँका तो देखा हमारे स्कूल की एक मस्त मैडम जिसका नाम पिंकी था, बारहवीं क्लास की एक लड़की माया से अपने दूध चुसवा रही थी।
हाय क्या नज़ारा था !
पीले रंग की साड़ी और उस पर अधखुला ब्लाऊज ! उस ब्लाऊज से निकला हुआ पिंकी का कोमल दूधिया स्तन ! माया ने दोनों हाथ से उसके स्तन को थाम रखा था और अपने पतले होठों से निप्पल चूस रही थी। मैं उन दोनों को देखने में मस्त था कि अचानक पिंकी की नजर मुझ पर पड़ गई। उसने हटने की कोई कोशिश नहीं की और मुझे हाथ से जाने का इशारा किया और आँख मार दी। मैं वहाँ से हट गया और बाजू वाले कमरे में जाकर छुप गया।
पाँच मिनट बाद माया वहाँ से निकल गई, पिंकी ने मुझे आवाज दी- मनुजी…!!
मैं- हह…हाँ?
पिंकी- बाहर आइए !
मैं चुपचाप बाहर निकल आया।
मुझे देख कर वो बोली- क्यों मनुजी? लड़कियों के बाथरूम में क्या चेक कर रहे थे?
मैं बोला- यही कि कोई गड़बड़ तो नहीं हो रही, आजकल के बच्चे सूनेपन का फायदा उठा लेते हैं ना !
पिंकी- हाय… सूनेपन का फायदा तो टीचर भी उठा सकते हैं।
मैं उसके करीब जाकर सट गया और उसके होंठ चूमने लगा, वो भी मेरे होंठ चूसने लगी। फिर मैंने उसके बदन को अपने बदन के और करीब खींचा तो वो कुनमुनाने लगी, मैंने उसके स्तन अपने हाथों में भर लिए और मसलने लगा। कुछ मिनट बाद वो बोली- ऐसे तो मेरे कपड़े ख़राब हो जायेंगे और सब शक करेंगे।
मैंने उसे कहा- स्कूल के बाद गेट पर मिलना !
वो मेरे लंड को मुट्ठी में मसल कर भाग गई।
मैंने योजना बनाई, मैं स्कूल के बाहर दुकान पर गया और दूकान वाले को बोला- राजू, तेरे और सुनीता के खेल के बारे में प्रिंसिपल को पता चल गया है, तेरे खिलाफ पुलिस में शिकायत जाएगी।
दुकानवाले की गांड फट गई, वो मेरे पैरों पर गिर गया।
मैंने उसे कहा- प्रिंसिपल ने मुझे कहा है शिकायत करने को ! मैं उसे दबा सकता हूँ पर मेरी शर्त है।
दुकान वाला खड़ा हुआ और बोला- जो आप कहें सरकार !
मैंने बोला- मेरे को तेरी दुकान का अन्दर वाला कमरा चाहिए, जब मैं चाहूँगा तब !
दुकान वाला बोला- ठीक है मालिक ! आप जब चाहो कमरा आपको दूँगा पर मुझे छुप कर देखने को तो मिलेगा ना?
मैं बोला- भोसड़ी के ! अगर तूने देखने की हिम्मत की तो तेरी गांड की फोटो निकाल कर तेरी बीवी को गिफ्ट करूँगा।
दुकानवाला माफ़ी मांगते हुए बोला- अरे, मैं तो मजाक कर रहा था ! ही…ही…ही…
स्कूल का कार्यक्रम ख़त्म होने के बाद मैं स्कूल के गेट के बाहर खड़ा हो गया। पिंकी आखिर में बाहर आई। मैंने उसे दुकान की तरफ बढ़ने को कहा। मैं दुकान में पहुँचा, दो कोल्ड ड्रिंक मंगाए और पिंकी को लेकर अन्दर के कमरे में चला गया। पिंकी अन्दर आते ही बोली- मनुजी, मुझे घबराहट हो रही है !
मैं बोला- कमसिन लड़कियों से चुसवाते वक़्त नहीं होती? असली मजा ले लो, फिर याद करोगी।
पिंकी- हाय मनुजी ! मैं क्या करती? साली ने बाथरूम में मेरी चूचियाँ दबा दी तो मैं गर्म हो गई, आप तो समझदार हो !
मैंने कहा- पिंकी जी, आपका ज्यादा समय नहीं लूँगा !
और मैंने उसके हाथ पकड़ कर हथेली चूम ली, उसके होठों से सिसकारी निकल गई। फिर मैंने उसे बिस्तर पर बिठाया और उसकी साड़ी का पल्लू हटा कर उसके ब्लाऊज के ऊपर चुम्मा लिया। उसके बाद एक हाथ से उसके मम्मे दबाता हुए उसके होठो को अपने होठों से सहलाने लगा। पिंकी के मुँह से ‘हाय मनु !’ निकला और वो मेरी बाहों में पिघल गई।
उसके बाद मैंने इत्मिनान से उसका ब्लाऊज खोला, उसके संतरों को प्यार से आज़ाद किया और उसके निप्पल मसलते हुए उसके नितम्बों को नंगा किया। उसकी प्यारी सी चूत मेरे हाथों में आते ही रस से भर गई और मैं खुद को उसकी जांघों के बीच घुसने से नहीं रोक पाया। मैंने बेझिझक खुद को पूरा नंगा किया और पिंकी के सारे कपड़े उतारे। उसके बदन के हर हिस्से को चूमते हुए मैं उसके कटिप्रदेश में उतर गया। मेरी जुबान ने जैसे ही उसकी भगनासा को छुआ, वो पागल हो गई और अपने दोनों हाथों से अपनी चूचियों को दबाने लगी। मैंने उसको और मस्ताने के लिए अपनी एक उंगली उसकी चूत में घुसा दी।
“हाय मनु जी… स्स्स्स… हाय अब करो न… प्लीज़… हाय मनु… अब आ जाओ न ऊपर… !! हाय लंड दे दो… मनु… मैं तो मर गई !!”
मैं भी अब गरमा चुका था… मैंने अपना लंड उसको दिया उसने अधखुली आँखों से मेरे लंड को निहारा और शर्म-हया भूलकर उसके मुहँ से अपना मुँह मिला दिया, उसके होंठ मेरे लंड के छेद को रगड़ रहे थे। मेरे लंड का टोपा पूरी तरह गुलाबी होकर फूलने लगा, मेरे मुँह से निकला- हाय मादरचोद ! कहाँ से सीखा ये जादू?
मेरे मुँह से गाली सुन कर मेरी गोलियों को मुट्ठी में भर कर बोली- अरे जानू ! तुम्हारा हथियार देख कर रहा नहीं गया और खुद ही कर डाला मैंने ! अब तो मेरी मारो न… !?!
पिंकी के स्वर में एक नशीली बात थी कि मैं उसके ऊपर लेट गया और उसके होठों को अपने होठों से मसलने लगा। उसने मेरे लंड को खुद ही अपने छेद में सेट किया और मेरे हल्के धक्के से ही मेरा पूरा लंड पिंकी की चूत में फिसल गया। हाय क्या मजा था !
मैंने पूछा- रानी शादी तो तुमने की नहीं? फिर यह मखमली चूत कैसे?
पिंकी बोली- हाय राजा ! मेरे बड़े भाई के एक दोस्त ने मुझे भाई की शादी में शराब पिला कर मेरी रात भर ली, मैं तब से अब तक सेक्स के नशे में रहती हूँ ! मैं खुद चाहती थी कि कोई मुझे कस कर चोदे ! आह… जोर से पेलो न… मेरे भाई के दोस्त से मैंने कभी बात नहीं की पर उस रात का नशा और मेरी चूत की सुरसुराहट हमेशा याद आती रही… म्मम्म… तुम्हारा लंड मेरी चूत… हाय… !!! और अन्दर आओ… स.स्स्स्स… हाय राजाजी… मेरी पूरी ले लो… मैं पूरी नंगी हूँ… तुम्हारे लिए… हाय… जब बोलोगे… सस…मैं तुमसे चुद जाऊँगी… हाय पेलो न… !!
मैं उसकी गर्म बातों से उत्तेजित हो रहा था… मेरी गोलियाँ चिपक रही थी… वीर्य निकलने को बेताब हो रहा था… मैंने उसकी चूत से लंड निकाला और पिंकी का पलट दिया और उसकी गांड को मसलते हुए अपना लंड उसकी चूत में पेल दिया… अब तो वो भी धक्के मारने लगी…
“हाय… इस मजे का क्या कहूँ ! हाय पिंकी रानी ! आज से मैं तेरा गुलाम हो गया रे… तेरी चूत का रस पिला दे… ”
“हाय… आह… सस… स्स्स्स…ले लो न मेरी आज… हाय… मैं गई…” कहकर पिंकी मेरे लंड को अपनी चूत में दबाये हुए सामने की ओर लुढ़क गई और मैं भी उसके ऊपर लेटे हुए अपने लंड से निकल रही पिचकारियों को महसूस करता रहा।
पाँच मिनट के बाद पिंकी ने मुझे बगल में लेटाया और मेरी बाहों में चिपक कर मुझे चूमने लगी… हम काफी देर तक चूमते रहे… फिर हम दोनों कपड़े पहने और अपने घर चले गए… पिंकी मेरी काफी अच्छी दोस्त बन गई, मैंने उसे सारे सुख दिए, उसने भी मुझे बहुत माना ! फिर उसकी शादी हो गई… शादी से पहले उसने मुझे कहा- …मनुजी, आपने मुझे बहुत सुख दिए हैं… पर शादी घर वालों की मर्जी से करना… फिर मैं तो आपके लंड का स्वाद चख चुकी, अब दूसरा खाऊँगी ! आप भी किसी कुंवारी मुनिया को चोद कर अपने लंड को नया मजा देना…
मैंने उसके होंठ चूम कर उसे विदा कर दिया…
मुझे उसके बाद सिर्फ शादीशुदा औरतों में ही मज़ा आता है, जिनके पति उन्हें संतुष्ट नहीं कर पाते उनकी मदद करने में मुझे सुख मिलता है।

झाँटों वाली प्रियंका

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प्यारे हवस के पुजारियो, मैंने दो साल से अन्तर्वासना स्टोरीज़ पर सेक्स की कई कहानियाँ पढ़ी हैं। तो आज मन हुआ कि अपनी जिंदगी के पहले सेक्स का अनुभव भी आप सभी को बता दूँ। मैं गुड़गाँव के एक छोटे से कस्बे का निवासी हूँ। बात आज से दो साल पहले मेरे कॉलेज के दिनों की है, मैं बारहवीं कक्षा तक एक शर्मीला लड़का रहा हूँ। कॉलेज के पहले दिन मैं काफ़ी नर्वस था, उस दिन कक्षा में हम पाँच ही विद्यार्थी थे, उन पाँच में एक लड़की भी थी, जिसका नाम प्रियंका था, वो मुझे पहले ही दिन से पसंद थी।
उस समय उसकी काया 28-28-30 की रही होगी। वो दिखने में एक पतली सी लड़की थी जिसका रंग काफ़ी गोरा था और उस दिन वो सफेद कपड़ों में काफ़ी उत्तेजक लग रही थी। मेरा दिल उस पर आ गया था।
एक महीने के अन्दर ही मैंने उसे अपने दिल की बात बता दी थी। उस समय उसने इनकार कर दिया तो मेरा दिल बैठ गया, लगने लगा जैसे सब कुछ खत्म हो गया हो। कॉलेज के दूसरे साल फेयरवेल पार्टी के दिन वो जब लाल साड़ी में आई तो मेरा लंड अचानक खड़ा हो गया। वो मेरे पास आई और बोली- मैं कैसी लग रही हूँ?
तो मैं उसे देख कर कुछ कह नहीं पाया बस हाथ से इशारा कर दिया कि सेक्सी लग रही हो। तो वो मुस्कुरा कर एक ओर चल दी और मैं भी उसके पीछे-पीछे हो लिया। एकांत में जाकर मैं उससे बोला- आज तो तुम वाकई सेक्सी लग रही हो।
तो वो ‘थैंक्स’ बोली, मैंने हिम्मत करके उसे दोबारा बताया कि मैं तुमसे दोस्ती करना चाहता हूँ।
तो वो मुस्कुरा कर बोली- मुझे भी तुम अच्छे लगने लगे हो।
पार्टी के अगले दिन हम कॉलेज पहुँचे तो वो फिर से सफेद ड्रेस में आई, मैंने उससे बोला- आज तो तुम गजब का माल लग रही हो। तो वो हँस कर क्लास में चली गई। मैं भी क्लास में गया तो देखा वो अकेली बैठी थी तो मैंने उसे क्लास में ही पकड़ लिया। वो बोली- छोड़ो क्या कर रहे हो.. कोई देख लेगा।
मैं बोला- कोई नहीं देखेगा, हम क्लास के समय से पहले आए हैं। कॉलेज में और कोई नहीं है।
वो घबराने लगी तो मैंने उसका हाथ पकड़ लिया। फिर मैंने उसकी चूची पकड़ कर भींच दी। उसके निप्पल खड़े हो गए थे। तभी उसने मेरे हाथ हटा दिए और बोली- तुम तो बड़े बेकार हो।
तो मैं बोला- इसमें खराबी ही क्या है, आगे चल कर तुम्हारा पति भी यही करेगा।
तो वो झेंप गई।
अगले दिन मैं जल्दी कॉलेज चला गया तो देखा कि वो पहले ही क्लास में बैठी थी। तो मैंने उसे पीछे से दबोच लिया, वो समझ गई कि मैं ही हूँ। मैंने फिर से उसके निप्पल भींच दिए और उसकी सलवार में हाथ डाल दिया मुझे घने बालों का जंगल महसूस हुआ तो मैंने कहा- ये क्या है?
तो उसने मेरा हाथ हटा कर कहा- ये अपने आप आए हैं।
मैंने उसका हाथ ज़बरदस्ती अपनी पैन्ट में डाला और कहा- ये शेव भी हो जाते हैं।
फिर हमने अगले दिल कॉलेज से घंटा गोल करके दिल्ली जाने का प्लान बनाया। अगले दिन हम बस से मेट्रो स्टेशन (हुड्डा सिटी सेंटर) पहुँचे। हम दोनों एक-दूसरे का हाथ थामे दिल्ली तीस हज़ारी स्टेशन तक गए और थोड़ी खरीददारी करके एक होटल में गए और एक रूम बुक किया। वो फ्रेश होने चली गई मैं भी उसके पीछे-पीछे बाथरूम में घुसने लगा, तो उसने दरवाज़ा बन्द कर दिया। मैं भी दरवाजे के बाहर ही खड़ा रहा। वो 5 मिनट में बाहर निकली तो मैंने उसे पकड़ लिया और बिस्तर पर ले गया।
वो बोली- ये क्या है?
तो मैंने कहा- कुछ नहीं बस मन कर रहा है।
मैंने उसके चूचे दबाने चालू कर दिए फिर एक हाथ उसके सलवार में डाल कर हिलाने लगा। वो मुझसे दूर होने की कोशिश करने लगी, तो मैंने अपने होंठ उसके होंठों पर रख दिए। दस मिनट तक ऐसा ही होता रहा। फिर अचानक वो मुझसे छूटी और बोली- यह सब ग़लत है।
मैं बोला- ऐसा नहीं है.. जान.. हम तो बस जरा मस्ती कर रहे हैं।
तो वो बोली- मैंने सुना है कि इससे दर्द भी होता है।
तो मैं तपाक से बोला- किसमें?
वो बोली- ज़्यादा बनो मत.. वो ही जो तुम करना चाहते हो… उसमें.!
मैं बोला- हाँ.. शुरू में थोड़ा होगा, पर बाद में मज़ा भी तो आएगा।
मैंने फिर से एक हाथ उसकी चूची और एक उसकी सलवार में डाल कर चुम्बन करने लगा। वो गरम होकर सिसकारियाँ भरने लगी। फिर 5 मिनट बाद मैंने उसकी सलवार का नाड़ा खोल दिया और उसके और अपने कपड़े उतार दिए। अब हम दोनों पूरे नंगे हो चुके थे। वो बिल्कुल अप्सरा लग रही थी उसकी चूत में से कुछ बह रहा था और झाँटों में लग रहा था। फिर मैंने उसके बाल साफ कर दिए और उसकी चूत में ऊँगली डाल कर आगे-पीछे करने लगा।
तो वो बोली- दर्द हो रहा है।
मैंने ऊँगली निकाली और उसको बिस्तर पर लिटा कर उसके चूचे चूसने लगा। फिर मैंने उसके चूत में जीभ डाल दी और चूसने लगा, वो छटपटाने लगी।
फिर मैंने उससे कहा- मेरा लंड अपने मुँह में लो।
तो वो मना करने लगी, मैंने ज़बरदस्ती उसके मुँह में लंड डाल दिया और चुसवाने लगा। फिर 5 मिनट बाद मैंने अपना लंड उसके चूत के छेद पर रख कर धक्का मारने की कोशिश की तो लंड फिसलने लगा। मैंने लंड पर थोड़ा आयल लगाया और छेद पर रख कर पूरे ज़ोर से धक्का मारा तो मेरा आधा लंड उसकी चूत में घुस गया। उसकी चीख निकल गई और वो चिल्लाने लगी- मर गई.. हाय.. इसे निकाल लो प्लीज़…बहुत दर्द हो रहा है..!
तो मैंने उसके होंठों को अपने होंठों से बंद कर दिया और एक और धक्का मारा तो वो बेहोश सी हो गई। मैंने अपना लंड आधा बाहर निकाल कर अन्दर-बाहर करना चालू कर दिया। वो चिल्लाती हुई ‘ऊआहहा.. उहूह.. अहह’ करने लगी। फिर पाँच मिनट में वो अपने चूतड़ उठा-उठा कर मेरा साथ देते हुए बोली- अब मज़ा आ रहा है.. और तेज और तेज..! चिल्लाने लगी।
लगभग 20 मिनट बाद मुझे लगा मैं झड़ने वाला हूँ तो मैंने अपना लंड बाहर निकाला और उसके मुँह में दे दिया। उसने मेरा लंड मुँह से एक ही झटके से निकाला और बोली- ये क्या कर रहे हो?
तो मैंने कहा- यह मेरा पहली चुदाई का वीर्य है, प्लीज़ मैं इसे यूँ ही जाया नहीं करना चाहता !
और लंड फिर से मुँह में डाल दिया। फिर वो मेरा सारा वीर्य पी गई और बोली- यह चुदाई तो बहुत महँगी पड़ती है, पर मज़ा भी आता है।
फिर हमने अपने कपड़े पहने और घर आ गए। उसके बाद कॉलेज में हर सप्ताह हम चुदाई करते थे। कॉलेज के बाद उसकी शादी हो गई, लेकिन जब भी वो अपने घर आती है तो सबसे पहले मुझे फ़ोन करके बताती है और हम मौका मिलते ही चुदाई करते हैं। दोस्तो, कहानी कैसी लगी ज़रूर बताएं।

हॉट लड़की की चुदाई

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अगर कहा जाए तो सब अपनी कहानी सच ही लिखते हैं। बस अपनी कहानी को थोड़ा रोमाँचक बनाने के लिए फालतू की बातें भी जोड़ देते हैं। जैसे अपने लण्ड के साइज़ को ही झूठ बोलते हैं और बोलेंगे भी क्यों नहीं… किसी भी लड़की को छोटा लण्ड अच्छा नहीं लगता।

भाई लोग मेरी कहानी भी ज़्यादा अलग नहीं है। अपनी कहानी शुरू करने से पहले अपने बारे में बताना तो बनता है।

मैं दिल्ली से हूँ और मेरी उम्र 19 साल है, मैं देखने में स्मार्ट हूँ, यह तो मैं ज़रूर कहूँगा जिससे लड़कियाँ मेरे से ज़्यादा बात करें। मैं फुल-टाइम मस्ती करता हूँ। अभी मेडिकल की कोचिंग के लिए कोटा आया हुआ हूँ।

तो शुरू करता हूँ… बात अगस्त की है, मैं कोटा में नया आया था और यहाँ साला मन भी नहीं लगता था।

अब एक दिन मेरे पास एक कॉल आया। वो कॉल मेरी पुरानी दोस्त अंजलि (नाम बदला हुआ) का था। उसने बताया कि वो भी कोटा में ही है और उसे यह नंबर मेरे घर से मिला है।

उसने काफ़ी देर तक बातें की। इन बातों में बस एक चीज़ ही मेरी पसन्द की थी।

उसने कहा- अगर तेरा यहाँ मन नहीं लग रहा है, तो तुझे कोई लड़की पटवाने में तेरी मदद करूँ..!

यह सुनकर मैं खुश हुआ.. अजी खुश क्या बहुत ही खुश हुआ..!

कुछ दिन बाद मैं अपने दोस्तों से बातें कर रहा था कि एक लड़की का कॉल आया।

उसने मुझे बताया कि आपका नंबर मुझे अंजलि ने दिया है।

मैंने उससे बातें भी खूब की, जैसे क्या कर रही है, मुझे देखा कि नहीं, मेरे से कब मिलोगी.. वगैरह वगैरह…!

उसने भी चूतिया बनाने वाले जवाब दिए।

उसने कहा- वो भी मेडिकल में है, उसने मेरा फोटो फ़ेसबुक पर देखा, कल ही मेरे से मिलेगी, फिल्म देखने के बहाने!

अब यार पहली बार कोई लौंडिया को बिना देखे मिलने जाना था, मेरी गांड फट रही थी कि कहीं छम्मक-छल्लो जैसी ना हो, काली सी ना हो, यह सब सोच कर मैं अपने दो दोस्त अभिषेक और शुभम को अपने साथ ले गया और उन्हें समझा दिया कि उसे पता ना चले कि तुम लोग मुझे जानते हो।

मैंने मूवी के टिकट ले लिए और उसका इंतजार करने लगा, साथ  में गांड भी फट रही थी कि कोई काली सी लड़की चेप ना हो जाए।

करीब 15 मिनट बाद अंजलि के साथ एक लड़की आई, कसम से एकदम मस्त माल.. मोटे-मोटे मम्मे, कमर पतली, गांड हाए… हाए.. दिल पे छुरियाँ चल गईं…!

अंजलि ने उससे मेरा परिचय करवाया, उसका नाम तो बताना ही भूल गया, उसका नाम संस्कृति था। अब मेरे दोस्तों ने मुझे देख कर मैसेज किया- बेटा मिल गई चोदने को रापचिक लौंडिया…! अब तो हमें भूल ही जाएगा…!
उनका मैसेज पढ़ कर मुझे अपने आप पर गर्व हुआ, हम लोग थियेटर में पहुँच गए।

सामने मूवी चल रही है और मैं संस्कृति के मम्मे देख रहा हूँ। अब हिम्मत करके मैंने उसके हाथ पर अपना हाथ रखा तो उसने अपना हाथ वहाँ से हटा लिया।

मेरी किस्मत तो देखो साला… तभी इंटरवल हो गया।

फिर साला टॉयलेट में दोस्तों ने पकड़ लिया। सवाल ऐसे पूछे जो सिर्फ़ दोस्त ही पूछ सकता है।

एक बोला- अबे साले ‘चूमा’ कितनी देर तक लिया?

दूसरा- चूची दबाकर मज़ा आया कि नहीं?

तीसरा- चूची चूसी या नहीं?

अब सालों से क्या कहता कि बहनचोद ने हाथ पर हाथ भी ना रखने दिया।

कुछ देर बाद मैं वापस थियेटर में पहुँच गया। अब मेरी गांड जल रही थी, उस लड़की के साथ मैं चुपचाप मूवी देखने लगा।

अब उसने ही मेरे हाथ पर हाथ रखा और पूछा- नाराज़ हो क्या?

लड़की ने शुरू किया तो मैंने मुस्कुरा कर कहा- नहीं.. नाराज़ नहीं हूँ… बस मूवी देख रहा हूँ।

उस दिन तो सिर्फ़ उसका हाथ ही पकड़ कर रह गया।

दो दिन बाद मैं फिर उसके साथ मूवी देखने गया। इस बार साली का चूमा भी लिया। उसके बाद तो आए दिन ही मूवी देखने भाग जाता था।

अब तो साली के मम्मे भी पिए और दबाए.. बस इससे ज़्यादा कुछ नहीं हुआ।

होता भी कैसे… थियेटर में तो जब मम्मे ही दबाने जाते हैं।

अभी सात दिन पहले मैंने उससे अपने हॉस्टल में आने के लिए कहा। शायद आज किस्मत साथ दे रही थी इसलिए हॉस्टल का मालिक भी नहीं था। सभी लड़के कोचिंग गए थे, जो सुबह वाले बैच के थे, वो सो रहे थे। अब मैंने अपने दोस्त को हॉस्टल के दरवाज़े पर खड़ा कर दिया और मैं अपनी आइटम को लेने चला गया।

साली कोचिंग के पास खड़ी थी, कन्धों पर बैग टांग रखा था.. हरे रंग का टॉप और जीन्स पहन रखी थी।

अपनी कसम… पूरी ब्लू-फिल्म की पॉर्न-स्टार लग रही थी। पर पता नहीं चलता, लड़कियों की दूर से गांड देख कर कैसे साला सबका लण्ड खड़ा हो जाता है, मेरा तो आज तक नहीं हुआ।

बस गांड को देखना अच्छा लगता था, पर दूर से देखने पर खड़ा कभी नहीं हुआ।

उसको अपने साथ लाने से भी गांड चौड़ी हो रही थी। क्योंकि उस एरिया में मेरे को सब जानते हैं!

मैंने संस्कृति से कहा- मेरे पीछे-पीछे आ जाओ… मेरे दोस्त शोएब ने संस्कृति और मुझे हॉस्टल में एंट्री करवाई.. पता नहीं शोएब ने क्या ऐसा किया था, पर उस दिन तो पूरा हॉस्टल खाली था।

अपनी आइटम को अपने रूम में लेकर आ गया, अब वो साली मेरे से बातें चोदने लगी!

संस्कृति- वैसे बाबू, तुम्हारी उमर क्या है?

मैं- मैं 19 साल का हूँ…!

संस्कृति- झूठ मत बोलो जान…!

मैं- सच जानू…!

संस्कृति- तुम तो मेरे से एक साल छोटे हो.. मैं 20 की हूँ…!

मैं- तो क्या हुआ.. आज कल तो सब चलता है…!

इस तरह चोदू किस्म की बातें.. जिनसे मुझे गुस्सा और आने लगा था.. मन कर रहा था कि बहनचोद को अभी धक्के मार कर बाहर निकल दूँ, पर मैंने अपने पर काबू किया..!

मुझे उस वक़्त उसकी चूत जो दिख रही थी।

मैं- प्यार उम्र नहीं देखता… अब तुम मेरे से प्यार करो या ना करो मैं तो करूँगा..!

इतना कहते ही मैंने अपने होंठ उसके होंठ से मिला दिए और लगा साली को चूसने। वो इसके लिए तैयार नहीं थी, लेकिन थोड़ी देर में उसको भी मज़ा आने लगा और वो भी मेरा साथ देने लगी।
पर वो ये सब अभी नहीं चाहती थी, वो मुझसे प्यार करने लगी थी। चुदाई के बारे में तो उसने कभी सोचा ही नहीं था, पर मैंने उसकी बात ज़्यादा ना सुनते हुए उसे दोबारा चुम्बन करने लगा।

मैंने उसे बिस्तर पर धक्का दिया, आज उसके आने की खुशी में मैंने बिस्तर फूलों से सजाया था। अब मैं उसके कपड़े उतारने लगा, थोड़ी सी देर में मैंने उसे नंगी कर दिया।

अब शर्म की वजह से मुझसे आकर चिपक गई, मैंने उससे बेतहाशा चूमा, अब वो मेरा साथ देने लगी थी।

मैंने भी अपने कपड़े उतार दिए, मैं भी अब उसके सामने नंगा था।

मैं उसके चूचे पी रहा था, जो सच में बहुत बड़े-बड़े थे, मेरे हाथ में भी नहीं आ रहे थे।

मैं कभी उसका दायाँ मम्मा कभी बायाँ मम्मा चूस रहा था।

मैं धीरे-धीरे नीचे आया, जहाँ चूत होती है और उसकी बुर चाटने लगा। एकदम साफ-सुथरी और गुलाबी चूत, जिस पर एक भी बाल नहीं था। संस्कृति सिसकारियाँ ले रही थी, मुझे भी मज़ा आ रहा था।
इसी बीच संस्कृति झड़ गई।

अब मेरे लण्ड को पास से देखती ही बोली- यार, ये क्या.. इतना बड़ा.. मेरे में चला जाएगा?

मैंने कहा- मुँह में डाल कर देखो, अगर मुँह में चला जाएगा, तो चूत में भी चला जाएगा!

इतना कहने पर वो मेरा लण्ड मुँह में लेकर चूसने लगी। कभी मुँह में रखकर टॉफ़ी की तरह चूसती तो कभी आगे-पीछे करके चूसती.. तो कभी गोलियों को चूसती।

मुझे खूब मज़ा आ रहा था, मैं झड़ने वाला था, उससे पूछा- कहाँ लोगी मेरा माल..! मुँह में या बदन पर?

उसने कहा- स्वाद लेकर देखने दो.. कैसा लगता है…!

और मादरचोदी मेरा पूरा माल अन्दर ले गई।

अब हम एक-दूसरे को चूमने लगे।

मैं फिर उसकी चूत चाटने लगा, कुछ देर बाद वो मेरा लण्ड चूसने लगी।

अब उसने कहा- अब नहीं रहा जाता, डाल दो अपना साँप मेरे बिल में..!

मैंने अपने लण्ड पर थोड़ा तेल लगाया और थोड़ा उसकी चूत में उंगली डाल कर लगाया।

लौड़ा निशाने पर रख कर एक-दो बार धक्के दिए, पर अन्दर नहीं गया। उसकी चूत बहुत कसी हुई थी। फिर मैंने ज़ोर से पकड़ कर एक धक्का दिया, आधा लण्ड चूत को चीरता हुआ अन्दर चला गया।

वो बहुत तेज़ चिल्लाई, उसकी चूत से खून की धार बहने लगी और आँखों से आँसुओं की धारा बहने लगी।

मैंने अपना हाथ उसके मुँह पर रख दिया और उसे चूमने लगा। उसके चूची पीने लगा और उससे सहलाने लगा।

जब थोड़ा आराम हुआ तो मैंने एक और धक्का दिया और पूरा साँप बिल में घुस गया। मैंने पूरा लण्ड उसकी चूत में पेल दिया, उसकी साँस एकदम रुक गई.. आँखें बाहर को निकल आईं। मैंने अपने होंठ उसके होंठों पर रखे और चूमने लगा। कुछ देर बाद वो नीचे से गांड हिलाने लगी, तभी मैंने भी उसका साथ दिया और आगे-पीछे होने लगा।

फिर 15 मिनट तक चूत-लण्ड का घमासान युद्ध हुआ। चूत.. लण्ड के सामने पानी-पानी हो गई।

अब हम दोनों आराम से पड़े हुए थे।

संस्कृति उठी अपनी चूत और बिस्तर को देख कर घबरा गई। उसकी चूत, गांड और बिस्तर खून में सने हुए थे।

मैंने उससे बताया कि पहली बार ऐसा ही होता है.. बाद में सब ठीक हो जाता है।

उसे चलने में दिक्कत हो रही थी, तो मैंने उससे पेनकिलर दी और उसे उसके हॉस्टल छोड़ कर आ गया!

तब से अब तक मैंने उसे 3 बार चोदा है।

कैसी लगी मेरी गाथा, दोस्तो, प्लीज़ अपने विचारों का अचार जरूर दें..!

Tuesday, 3 December 2019

बॉयफ्रेंड ने सिल तोड़ दी

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हैलो… मैं प्राची हूँ, मुरादाबाद (उत्तरप्रदेश) की रहने वाली हूँ। अभी नई-नई अल्हड़ जवानी में पकी हुई सरसों की बालियों जैसी लहलहा रही हूँ। मेरे वक्ष के उभर 34 इंच के हैं और शक्ल आलिया भट्ट जैसी है। जो भी मुझे एक बार देख ले बस समझिए कि उसका सिग्नल अप हो जाता है।
मेरी सील टूट चुकी है जो कि मेरी खुद की चुदास ने मेरे अपने बॉय-फ्रेंड से तुड़वा दी थी। उसी की यह कहानी लिख रही हूँ, अच्छी लगे या बुरी, मुझे जरूर मेल करना।
तीन साल पहले की बात है, मैं 12वीं में पढ़ती थी, बोर्ड के एग्जाम थे सो कोचिंग जाती थी। कोचिंग में ही मेरे बगल की सीट पर एक गबरू जवान लड़का पीयूष से मेरी आँख लड़ गई। शुरुआत तो उसने नहीं की थी, पर ‘चुल्ल’ तो मेरी जवानी में थी, सो खुद ही उस को झुक-झुक कर अपनी घाटियाँ दिखाने लगी।
लौंडा जवान था साला.. कब तक नहीं फिसलता।
मेरी गोरी-गोरी मुसम्मियाँ देख कर हरामी का लौड़ा फुफकारने लगता होगा। मुझे इस बात की जानकारी थी कि जब मैं झुक कर उसे अपने मम्मे दिखाती हूँ तो वो मुझे बड़ी प्यासी नजरों से देखता था।
मैं भी अन्दर ही अन्दर सोचती थी कि मसक दे मेरे मम्मे हरामी..पर साला फट्टू था।
वो बस होंठों पर जुबान फेर कर रह जाता था, बड़ी हद हुई तो लौड़ा सहला देता था।
मैं मन ही मन कुढ़ती थी कि कहीं मैं साले नामर्द पर दांव तो नहीं लगा रही हूँ..!
फिर एक दिन मैंने अपना मन पक्का कर लिया था कि आज इस चूतिया से कुछ बात करूँगी।
रोज की तरह कोचिंग में मेरे बगल में आकर बैठ गया, कुछ देर बाद मैंने अपना पेन नीचे गिरा दिया और झुक कर उठाने के लिए उसकी तरफ देखा।
तो उसने कहा- इधर नीचे गिरा है.. उठा ले..!
मैंने तनिक मुस्कुरा कर कहा- मतलब तुझे मालूम ही कि मैं ही झुक कर उठाऊँगी.. तू नहीं उठाएगा बल्कि देखेगा..!
बोला- क्या देखूँगा…?
मैंने भी ठोक कर कह दिया- जैसे तू तो सूरदास की औलाद है कुछ देखता ही नहीं है..!
बोला- तू क्या देखने दिखाने की बात कर रही है मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा … खुल कर बोल न ..!
मैंने कहा- तुझे संतरे अच्छे लगते हैं?
“हाँ ..मेरा तो सबसे पसन्दीदा फल है ..!”
“तुझे संतरे देखना अच्छा लगता है..!”
“देखने से क्या होता मैं तो संतरा का रस पीता हूँ..!”
अब बात कुछ दोअर्थी होने लगी थी, जिसे मैं भी समझ रही थी और पीयूष भी समझ रहा था।
मैं अपना पेन उठाने उसकी तरफ को झुकी और उसने भी डेस्क के नीचे अपने हाथ ले जाकर मेरे मम्मों को मसक दिया। मेरे मुँह से हल्की सी सिसकारी निकल गई ‘उई’.. उसने जल्दी से हाथ हटा लिया। मैंने पेन उठाया और ऊपर को उठते हुए उसके लौड़े को मसल दिया।
वो मेरी हरकत को देख रहा था, उसे एक बार तो विश्वास ही नहीं हुआ कि मैंने उसका लौड़ा दबाया है।
मैं उसकी तरफ देख कर मुस्कुरा दी, उसने भी मुझे आँख मार दी।
बस उसी समय से मुझे वो वाला गाना बहुत पसंद हो गया-
“एक आँख मारूँ तो, परदा हट जाए,
दूजी आँख मारूँ कलेजा कट जाए..!
दोनों आँखें मारूँ तो ..
छोरी पट जाए.. छोरी पट जाए…
खैर साहब लौंडा पट गया था, अब मुझे अपनी ‘कंटो’ की खुजली का इलाज कराना था।
कोचिंग खत्म हुई पीयूष और मैं बाहर निकले, पीयूष ने मुझसे कहा- चल कॉफ़ी पीने चलते हैं।
मैंने कहा- आज नहीं कल चलेंगे .. आज जल्दी जाना है, कल तू जल्दी आ जाना। मैं घर पर कह कर आऊँगी कि मुझे एक सहेली के घर नोट्स लेने जाना है।
“ठीक है हनी .. बाय..!”
हय… उसके मुँह से ‘हनी’ सुना तो कलेजे में ठंडक पड़ गई। जीवन में पहली बार किसी लड़के ने प्यार से ‘हनी’ बोला था।
घर जाकर बिस्तर पर औंधी हो कर लेट गई.. दिल सातवें आसमान पर था। मानो जगत की सारी खुशियाँ मिल गई हों।
मैं हवा में उड़ने लगी थी।
अब बस पीयूष ही पीयूष दिख रहा था। बार-बार मेरा हाथ मेरी चूचियों पर जाता था।
उसके हाथों ने मेरी चूचियों को मसका था, बस बार-बार उसी स्पर्श को याद कर रही थी।
तभी पीयूष का मैसेज आया, “आई लव यू”.. दिल बाग़-बाग हो गया। मैंने भी तुरन्त जबाब दे दिया, “आई लव यू टू”।
अब हमारे प्यार की कहानी आगे बढ़ने लगी रोज ही आँखों में मस्ती होती थी। मैं अपने सजने-संवरने पर विशेष ध्यान देने लगी थी। अपने मम्मों को उठा कर चलने लगी थी और पीयूष को मम्मों की झलक आराम से मिले ऐसी कोशिश करने लगी थी।
एक दिन पीयूष ने मुझे मैसेज भेजा, “अब रहा नहीं जाता है मुझे सब कुछ करना है..!”
मैंने भी जबाब दे दिया, “रोका किसने है…!”
उसका फिर से मैसेज आया, “किधर मिलें..?”
मैंने लिखा, “मुझे नहीं मालूम..!”
उसने कहा- बाहर चलेगी..!
मैंने कहा- सोच कर बताऊँगी..!
अब बस दिल में बेचैनी थी कि कैसे मिलें और अपनी आग बुझाएं।
जल्द ही मौका मिल गया मुझे एक टेस्ट देने के लिए दिल्ली जाना पड़ा।
मैंने घर में बताया तो मम्मी ने कहा- ठीक है चली जा वहाँ तेरे मामा रहते हैं उनके घर पर रुक जाना।
मैंने कहा- ठीक है।
अब मैंने पीयूष को बताया तो उसने एक दिन पहले दिल्ली पहुँच कर एक होटल में सब बुकिंग वगैरह कर ली। मैं अपने एक परिचित के साथ दिल्ली तक गई और मामा जी के घर पर रुक गई।
एक घंटे बाद को मैंने पीयूष को बताया और उसको मुझे ले जाने को कहा तो वो नजदीक के बस स्टॉप पर खड़ा हो गया।
मैं मामी से कह कर सेंटर देखने निकल गई।
दूसरे दिन पेपर था, मैं मामी से कह कर गई थी कि मुझे समय लग सकता है आप परेशान मत होना।
बस स्टॉप पर पीयूष मिला और हम लोग होटल पहुँच गए।
होटल में जैसे ही हम रूम में गए तो दोनों ही बेसब्र थे। पीयूष ने मुझे बाँहों में ले लिया और मैं भी उसके आगोश में लता सी लिपट गई।
ऐसा लग रहा था कि न जाने कब से बिछुड़े हों।
उसने मेरे होंठों को अपने होंठों से सटा लिया और हम दोनों ही एक-दूसरे को जी भर कर चूमने और चूसने लगे।
उसने अपनी जीभ मेरे मुँह में डाल दी। मैं उसकी जीभ को जबरदस्त तरीके से चूस रही थी। इसी गुत्थमगुत्था में कब हमारे कपड़े हमसे अलग हो गए, पता ही नहीं चला।
पीयूष ने मुझे पूरा नंगा कर दिया था और खुद भी नंगा हो चुका था।
उसने मुझे अपनी गोद में उठाया और बिस्तर पर ले गया। हमारी आँखों में सिर्फ चुदाई का नशा था। दुनिया जहान की तो जैसे कुछ याद ही नहीं थी।
पीयूष मेरे मम्मों को चूसने लगा। मेरी चूत में चींटियाँ सी रेंगने लगीं। मैंने भी उसका 6” का लौड़ा पकड़ लिया।
पीयूष का लौड़ा एकदम कड़क था। मैंने जैसा ब्लू-फिल्मों में देखा था कि कुछेक लौड़े बिल्कुल केले की तरह गोलाई लिए होते थे बिल्कुल वैसा ही लौड़ा मेरी चूत की सील तोड़ने के लिए लहरा रहा था।
उसके लौड़े की एक और ख़ास बात थी कि वो गोरा था।
अब पीयूष और मुझे बहुत चुदास चढ़ चुकी थी, सो वो मेरे ऊपर आ गया और उसने मेरी दोनों टाँगों को फैला दिया और मेरी चिकनी चूत में एक ऊँगली डाली। पानी से लिसलिसी चूत देख कर पीयूष ने झट से अपने लौड़े का सुपारा मेरी चूत की दरार पर रख दिया।
इस समय मुझे वे सभी बातें बकवास लग रही थीं कि जब पहली बार लौड़ा घुसता है, तो बहुत दर्द होता है बल्कि मुझे तो ऐसा लग रहा था कि कब मेरी चूत में यह किल्ला घुसे, पर मैं कितनी गलत थी। पीयूष ने सुपारा मेरी दरार में जैसे ही फंसाया, मेरी आँखें फट गईं … बहुत जोर से पीड़ा हुई। चुदाई का सारा ज्वार झाग सा बैठ गया। यूं समझिए कि पीयूष ने सुपारा फंसाने के साथ ही एक जोर का शॉट मार दिया और उसका लण्ड मेरी चूत को फाड़ता हुआ अन्दर प्रविष्ट हो गया।
चूत के पानी की चिकनाई ने लौड़े को एकदम से अन्दर खींच लिया और मेरी चूत ने अपनी झिल्ली तुड़वा ली।
बहुत दर्द हो रहा था पर पीयूष पर तो जैसे चुदाई का भूत सवार था, उसने मुझ पर जरा भी रहम नहीं किया और ताबड़तोड़ दो-तीन धक्के लगा कर पूरा मूसल अन्दर पेल दिया। मैं दर्द से छटपटा रही थी।
मैंने पीयूष से कराहते हुए कहा- जानू मैं मर जाऊँगी तुम बाहर निकाल लो प्लीज़ …!
पीयूष अब कुछ शान्त हुआ और उसने रुक कर मुझे पुचकारना आरम्भ कर दिया।
लगभग 2-3 मिनट के बाद ही मेरा दर्द कुछ कम होने लगा और फिर पीयूष ने मुझे धीरे-धीरे चोदना चालू किया। कुछ और धक्कों तक मुझे दर्द हुआ फिर मुझे कुछ सनसनी सी होने लगी और दर्द अब आनन्द में बदल गया। तब भी मैं कुछ अधिक नहीं कर पा रही थी, लेकिन दर्द नहीं हो रहा था। पीयूष मुझे लगातार रौंद रहा था।
फिर उसने मेरी आँखों में झाँका और झड़ने का इशारा किया, मैं मूक थी मुझे कुछ समझ ही नहीं आ रहा था कि क्या कहूँ और पीयूष ने अपना लावा मेरी चूत में ही छोड़ दिया।
उसके गरम पानी ने मेरी चूत की जैसे सिकाई कर दी, उसका वो लावा जबरदस्त आराम दे रहा था।
कुछ मिनट तक हम दोनों यूँ ही लिपटे पड़े रहे फिर पीयूष उठा उसने अपने लौड़े को बाहर निकाला तो खून की एक लकीर सी दिखाई दी। मुझे मालूम था कि मेरी सील टूट चुकी है। मैंने अपना सर्वस्व पीयूष पर न्यौछावर कर दिया था।
मैं पीयूष के साथ होटल की वो दास्तान बार-बार दोहराती रही और इस बात को आज 3 साल हो चुके हैं। पीयूष दिल्ली जा चुका है और मैं उसकी याद में बैठी हूँ कि वो कब आएगा और मुझे अपनी दुल्हनिया बनाएगा..!
मेरी प्यार की इस सच्ची कहानी को आपके सामने रखी है और आप सब की दुआएं चाहती हूँ कि मेरा प्यार जल्द मुझे वापिस मिल जाए।

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